जंगल कटाई और अतिक्रमण से बिगड़ रहा वन संतुलन
जिला:- गौरेला पेंड्रा मरवाही (छत्तीसगढ़)
स्थान:- मरवाही
संवाददाता:- प्रयास कैवर्त | मो. 9755324209
मरवाही वनमंडल में इन दिनों भालुओं के हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला गुलीडांड क्षेत्र का है, जहां महुआ बीनने गई तीन महिलाओं पर भालुओं ने प्राणघातक हमला कर दिया। महिलाओं की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल महिलाओं को तत्काल डायल 108 एम्बुलेंस सेवा की मदद से मरवाही के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। इनमें से दो महिलाओं की हालत गंभीर बताई जा रही है।
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीण शाम होते ही घरों से बाहर निकलने से कतराने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि भालुओं के बढ़ते हमलों के पीछे मरवाही वनमंडल में हो रही अंधाधुंध जंगल कटाई और भूमि अतिक्रमण मुख्य कारण हैं। इससे वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है और वे आबादी की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं।
वन विभाग पर लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि मरवाही वनपरिक्षेत्र अधिकारी रमेश खैरवार अक्सर कार्यालय से नदारद रहते हैं और वन विभाग की पूरी व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। वन विभाग की इस उदासीनता और लापरवाह कार्यशैली को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है।
राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज
भालुओं के हमले और वन विभाग की लापरवाही को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता वीरेंद्र सिंह बघेल ने वन विभाग पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि “मरवाही में वनों की अंधाधुंध कटाई चरम पर है और वन भूमि पर अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है। वन विभाग के अधिकारी कार्यालयों में नहीं मिलते और कर्मचारी मनमर्जी से काम कर रहे हैं।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि मरवाही वनमंडल में तुरंत विशेष अभियान चलाकर वन्यजीव सुरक्षा, जंगल की कटाई रोकने और अतिक्रमण हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
सरकार की योजनाओं की जमीन पर सच्चाई
हालांकि सरकार भालुओं के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए करोड़ों की योजनाएं चला रही है, लेकिन मरवाही की ज़मीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। लगातार हो रही घटनाएं यह साफ करती हैं कि योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं।





