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सीएम डॉ. यादव ने माण्डू का पुरातात्विक वैभव देखा, जहाज महल और हिंडोला महल का भ्रमण किया

CM Dr. Yadav saw the archaeological splendor of Mandu, visited Jahaaz Mahal and Hindola Mahal

धरमपुरी में माँ नर्मदा के दर्शन कर भगवान शिव का अभिषेक और महर्षि दधिच की प्रतिमा का किया पूजन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को माण्डू में रात्रि विश्राम के बाद गुरूवार सुबह माण्डू के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक वैभव को देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जहाज महल और हिंडोला महल का भ्रमण किया। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों द्वारा उन्हें इन ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विगत रात्रि माण्डू में लाइट एंड साउंड शो के ज़रिए यहां के इतिहास को देखा। इस अवसर पर केन्द्रीय राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, विधायक धरमपुरी श्री कालूसिंह ठाकुर तथा अन्य जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने देखा खुरासानी इमली का प्राचीन वृक्ष

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माण्डू में खुरासानी कोठी परिसर में लगे खुरासानी इमली के प्राचीन वृक्ष को देखा। कलेक्टर धार श्री प्रियंक मिश्र ने बताया कि माण्डू में खुरासानी के वृक्ष पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ 500 वर्ष से भी अधिक प्राचीन हैं। खुरासानी कोठी परिसर के इस वृक्ष का तना 10.85 मीटर व्यास का है। खुरासानी इमली घना छायादार पेड़ होता है। यह पेड़ अपने भीतर सवा लाख लीटर पानी जमा करके रख सकता है। उल्लेखनीय है कि 14वीं शताब्दी में ये पेड़ लगाए गए थे। कई पेड़ यहां पांच-छ: सौ साल पुराने हैं। पर्यटक माण्डू आने की स्मृति के तौर पर माण्डू की इमली खरीदकर ले जाते हैं। कई आदिवासी परिवारों को इसे बेचने से आय हो रही है। मूलतः यह वृक्ष अफ्रीका, अरब और मेडागास्कर पर पाया जाता है। ये पेड़ अति विशाल हैं, इसकी उम्र हज़ारों साल होती हैं। मराठीभाषी क्षेत्रों में इसे गोरखचिंच (चिंच याने इमली) कहकर सन्त गोरखनाथ से इसका पवित्र सम्बन्ध जोड़ा जाता है।

धरमपुरी में किया माँ नर्मदा का पूजन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों के साथ धरमपुरी में नर्मदा दर्शन कर पूजन किया। धरमपुरी नर्मदा नदी के किनारे बसा हुआ नगर है। यहाँ नर्मदा नदी की दो धाराओं के बीच बेंट नामक एक टापू स्थित है, जहां श्री बिल्वामृतेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर स्थित है। मुख्यमंत्री ने यहां भगवान शिव का अभिषेक किया। मंदिर के निकट महर्षि दधिच की प्रतिमा का पूजन किया। पौराणिक मान्यता अनुसार यहां दधिच ऋषि की समाधि एवं तपस्या स्थली भी है। इसी स्थान पर इन्द्र स्वयं आये थे और दधिचि ऋषि से उन्होंने राक्षस के वध के लिये अस्थियां माँगी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री बिल्वामृतेश्वर महादेव मंदिर बैंट के हर तरह के संरक्षण के निर्देश अधिकारियों को दिये।

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