भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सेंट्रल जेल में इस बार ईद के अवसर पर कैदियों को खुली मुलाकात की अनुमति नहीं दी जाएगी। जेल प्रशासन ने इस फैसले के पीछे सुरक्षा कारणों और जेल में चल रहे निर्माण कार्यों का हवाला दिया है। हर साल राखी, ईद और दीपावली जैसे त्योहारों पर कैदियों को विशेष मुलाकात का अवसर दिया जाता था, लेकिन इस बार यह व्यवस्था नहीं होगी।
कैदियों और परिजनों की नाराजगी
इस फैसले से कैदियों और उनके परिजनों में नाराजगी देखी जा रही है। वे मानते हैं कि त्योहारों पर खुली मुलाकात एक परंपरा रही है, जिससे कैदियों को अपने परिवार से मिलने और भावनात्मक रूप से जुड़ने का अवसर मिलता था। कैदियों के परिजनों का कहना है कि यह नियम केवल ईद पर ही लागू किया जा रहा है, जो उचित नहीं है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने जेल महानिदेशक (डीजी) को पत्र लिखकर इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पिछले 40-45 वर्षों से त्योहारों पर खुली मुलाकात की परंपरा रही है और इस दौरान कभी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। उन्होंने जेल प्रशासन से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है।
वहीं, भाजपा नेता अजय सिंह यादव ने जेल प्रशासन के इस फैसले को उचित ठहराया है। उनका कहना है कि भोपाल सेंट्रल जेल में कई खतरनाक अपराधी बंद हैं और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर अनावश्यक राजनीति कर रही है।
जेल प्रशासन का पक्ष
भोपाल सेंट्रल जेल के अधीक्षक राकेश भांगरे के अनुसार, जेल में निर्माण कार्य चल रहा है और सुरक्षा कारणों से इस बार खुली मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई है। हालांकि, सामान्य मुलाकात की व्यवस्था जारी रहेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब जेल में स्थिति सामान्य हो जाएगी, तब पहले की तरह त्योहारों पर विशेष मुलाकात का प्रावधान फिर से किया जा सकता है।
भोपाल सेंट्रल जेल की वर्तमान स्थिति
भोपाल सेंट्रल जेल में 3,500 से अधिक कैदी बंद हैं, जिनमें कई हाई-प्रोफाइल अपराधी भी शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि खुली मुलाकात के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।
निष्कर्ष
ईद के मौके पर खुली मुलाकात बंद करने का यह फैसला कैदियों और उनके परिजनों के लिए निराशाजनक है, लेकिन प्रशासन इसे सुरक्षा और निर्माण कार्यों से जोड़कर देख रहा है। राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद हैं, लेकिन जेल प्रशासन अपने फैसले पर कायम है। अब देखना यह होगा कि आगे इस नियम में कोई बदलाव होता है या नहीं।
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