BY: Yoganand Shrivastva
Indian Navy Next Generation Corvettes भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने नौसेना के लिए आठ अगली पीढ़ी के कॉर्वेट युद्धपोत बनाने की 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना को मंजूरी दे दी है। इन युद्धपोतों का निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में किया जाएगा।
दोनों सरकारी शिपयार्ड के साथ परियोजना को लेकर आने वाले दिनों में अनुबंध पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इससे नौसेना के सतही बेड़े को मजबूती मिलेगी और देश में युद्धपोत निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
2,000 टन वजन और 55 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी रफ्तार
Indian Navy Next Generation Corvettes अगली पीढ़ी के ये आठ युद्धपोत लगभग 2,000 टन वजनी होंगे। इनकी अधिकतम गति करीब 30 नॉट्स यानी लगभग 55 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इन्हें भारतीय नौसेना द्वारा विकसित आधुनिक स्टेल्थ डिजाइन के आधार पर तैयार किया जाएगा। इस तकनीक से दुश्मन के रडार की नजर में आने की संभावना कम होगी।
इन युद्धपोतों को अलग-अलग समुद्री अभियानों के लिए तैयार किया जाएगा। इनमें सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों, पनडुब्बियों और हवाई हमलों से मुकाबला करने की क्षमता होगी। इसके अलावा ये तटीय सुरक्षा, समुद्री गश्त और खोज एवं बचाव अभियानों में भी उपयोगी साबित होंगे।
70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल
Indian Navy Next Generation Corvettes सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत इन युद्धपोतों के निर्माण में 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे घरेलू रक्षा उद्योग और जहाज निर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की इस परियोजना का काम GRSE और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के बीच बांटा जाएगा। इससे दोनों शिपयार्ड को लंबे समय तक काम मिलेगा। साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) से जुड़े उद्योगों में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
2030 तक पहला युद्धपोत सौंपने का लक्ष्य
Indian Navy Next Generation Corvettes परियोजना के तहत पहले युद्धपोत का निर्माण एक साल के भीतर शुरू होने की संभावना है। इसे वर्ष 2030 तक नौसेना को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इन युद्धपोतों की आपूर्ति अगले चार से पांच वर्षों में शुरू होने की उम्मीद है।
हिंद महासागर में नौसेना की ताकत बढ़ेगी
यह परियोजना ऐसे समय में मंजूर हुई है, जब भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए अपने बेड़े का आधुनिकीकरण कर रही है। क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच नए युद्धपोत नौसेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करेंगे।
यह परियोजना नौसेना के मौजूदा युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके तहत नीलगिरि श्रेणी के फ्रिगेट, अगली पीढ़ी के विध्वंसक और बेड़े को सहायता देने वाले जहाज भी तैयार किए जा रहे हैं।
इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए 2.12 लाख करोड़ रुपये के रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी।


