CJP : दिल्ली हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने दायर की थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि राजधानी में हाल के विरोध-प्रदर्शनों के कारण आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। याचिका में दावा किया गया कि प्रदर्शन के चलते यातायात प्रभावित हुआ और व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों तथा अन्य नागरिकों की रोजमर्रा की गतिविधियों में बाधा आई।
याचिकाकर्ता ने अदालत से कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ कार्रवाई करने और प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए मुआवजे की व्यवस्था करने का निर्देश देने की मांग की थी। अंतरिम राहत के तौर पर पार्टी को 50 करोड़ रुपये जमा कराने की मांग रखी गई। याचिका में यह भी कहा गया कि ऐसी आर्थिक जवाबदेही तय होने से भविष्य में सार्वजनिक जीवन को प्रभावित करने वाले प्रदर्शनों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ये याचिकाकर्ता के आरोप और मांगें हैं, अदालत की ओर से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं।
CJP : सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित हैं प्रदर्शन से जुड़े मामले
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े कई मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि एक ही विषय से संबंधित मामलों में अलग-अलग आदेश आने की स्थिति से बचना जरूरी है। पीठ के अनुसार, न्यायिक अनुशासन की मांग है कि जब समान मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय विचार कर रहा हो, तो हाईकोर्ट ऐसा आदेश देने से बचे जो उसके आदेशों से टकरा सकता है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उनकी याचिका में मांगी गई राहत सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं से अलग है। उनका तर्क था कि जहां अन्य मामलों में प्रदर्शन को लेकर अलग तरह की राहत मांगी गई है, वहीं उनकी याचिका का मुख्य उद्देश्य कथित नुकसान से प्रभावित आम लोगों के लिए मुआवजे की व्यवस्था करना है। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने मामले को अपने स्तर पर आगे सुनने से इनकार कर दिया।
CJP : हाईकोर्ट ने याचिका पर गुण-दोष के आधार पर फैसला नहीं दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 अक्टूबर को याचिका का निपटारा करते हुए अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी को अपनी मांगों के साथ सुप्रीम कोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि समान मुद्दों पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है, इसलिए इस मामले में अलग आदेश जारी करना उचित नहीं होगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने याचिका में मांगे गए 50 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूर नहीं किया और न ही यह तय किया कि कॉकरोच जनता पार्टी कथित नुकसान के लिए जिम्मेदार है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय दिए बिना याचिकाकर्ता को उचित मंच पर अपनी बात रखने का रास्ता दिया है।
CJP : अभिजीत दिपके ने बीजेपी के प्रदर्शन पर उठाए सवाल
इस पूरे विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली में बीजेपी की ओर से निकाले गए प्रदर्शन पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या बीजेपी का मार्च निर्धारित विरोध स्थल पर आयोजित किया गया था और त्योहारों के दौरान कारोबार पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर पार्टी का क्या रुख है।
दिपके की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के स्थान, यातायात व्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों पर उनके प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। एक ओर व्यापारी बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और कारोबार प्रभावित होने की आशंका जता रहे हैं, वहीं राजनीतिक दल एक-दूसरे के प्रदर्शनों और उनके प्रभाव पर सवाल उठा रहे हैं।
CJP : सोशल मीडिया पर भी प्रदर्शन और नियमों को लेकर बहस
बीजेपी के मार्च के बाद सोशल मीडिया पर भी विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े नियमों को लेकर चर्चा हुई। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू प्रतिबंधों का पालन हुआ या नहीं। कुछ टिप्पणियों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 का भी जिक्र किया गया और पूछा गया कि संबंधित परिस्थितियों में पुलिस ने क्या कार्रवाई की।
हालांकि, सोशल मीडिया पर किए गए सवाल अपने आप में किसी नियम के उल्लंघन का प्रमाण नहीं हैं। किसी प्रदर्शन की वैधता तय करने के लिए उसकी अनुमति, लागू आदेशों, स्थान और वास्तविक परिस्थितियों की जांच जरूरी होती है।
CJP : दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन और कारोबार का मुद्दा बना चर्चा का केंद्र
दिल्ली में हाल के प्रदर्शनों को लेकर अब राजनीतिक बहस के साथ-साथ कानूनी सवाल भी सामने आ रहे हैं। व्यापारियों और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से सार्वजनिक असुविधा तथा संभावित आर्थिक नुकसान का मुद्दा उठाया गया है, जबकि प्रदर्शन करने वाले संगठनों के अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी बनी हुई है।
50 करोड़ रुपये के अंतरिम मुआवजे की मांग वाली याचिका पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं। फिलहाल, मुआवजे की मांग पर कोई आदेश पारित नहीं हुआ है और कथित नुकसान की जिम्मेदारी भी इस याचिका में तय नहीं की गई है।


