BY: Yoganand Shrivastva
Kanpur News उत्तर प्रदेश के कानपुर में 35 साल पुराने एक बहुचर्चित मामले में खाकी को शर्मसार करने वाला सच सामने आया है। वर्ष 1991 में कथित रूप से एक फर्जी मुठभेड़ की झूठी कहानी गढ़कर 12 निर्दोष लोगों को डकैती और हथियारों की बरामदगी के मामले में फंसाने वाले तत्कालीन 12 रिटायर्ड पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। सीबी-सीआईडी (CB-CID) की लंबी जांच में पुलिसकर्मियों के तमाम दावे पूरी तरह से फर्जी पाए जाने के बाद यह सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है।
1991 का मुठभेड़ ड्रामा और रिश्वत में प्लॉट मांगने की रंजिश
Kanpur News घटना 22 अगस्त 1991 की है, जब महाराजपुर थाना पुलिस ने दावा किया था कि जीटी रोड पर नरवल मोड़ के पास हथियारों से लैस बदमाश लूट की योजना बना रहे हैं और 23 अगस्त की रात हुई मुठभेड़ के बाद राकेश पाठक समेत 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, इस पूरी साजिश की असल वजह बेहद हैरान करने वाली थी। पीड़ित राकेश पाठक के भाई देव प्रसाद पाठक के अनुसार, तत्कालीन थाना प्रभारी विद्यासागर त्रिपाठी ने उनसे रंगदारी के रूप में 400 वर्ग गज का प्लॉट मांगा था। जब उन्होंने जमीन देने से साफ इनकार कर दिया, तो उनके भाई और उनके साथियों को झूठे डकैती केस में फंसाकर प्रताड़ित किया गया।
सीबी-सीआईडी जांच में खुला फर्जीवाड़े का राज
Kanpur News उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद परिजनों ने सीबी-सीआईडी जांच की मांग उठाई थी। जांच के दौरान चश्मदीदों (डीसीएम चालक व क्लीनर) ने खुलासा किया कि पुलिस ने निर्दोष लोगों को जबरन उठाकर थाने पहुंचाया था और मौके पर न तो कोई मुठभेड़ हुई थी और न ही लूट का प्रयास। आरोपियों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई और फर्जी तरीके से हथियारों की बरामदगी दिखाई गई। सीबी-सीआईडी निरीक्षक सुशील कुमार की शिकायत पर महाराजपुर थाने में साक्ष्य गढ़ने, अवैध हिरासत, और मारपीट जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
18 पुलिसकर्मी थे नामजद, 6 की हो चुकी है मृत्यु
Kanpur News पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार, जांच में तत्कालीन थाना प्रभारी विद्यासागर त्रिपाठी और जांच अधिकारी रमेश चंद्र भटोले समेत कुल 18 पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आई थी। हालांकि, इनमें से 6 पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है। अब बचे हुए 12 रिटायर्ड पुलिसकर्मियों—जिनमें उपनिरीक्षक, हेड कांस्टेबल, कांस्टेबल और चालक शामिल हैं—के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर सीबी-सीआईडी ने आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।


