RSS Centenary : पीएम मोदी ने संघ प्रमुख के संबोधन को सराहा, कहा- आपका बयान प्रेरणादायी
RSS Centenary : नागपुर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में आयोजित विजयादशमी समारोह में सरसंघचालक मोहन भागवत ने वैश्विक अस्थिरता, राष्ट्र की एकता, तकनीक के बढ़ते प्रभाव और सामाजिक चुनौतियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल की घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि दुनिया के कई देशों में सत्ता परिवर्तन यानी ‘रिजीम चेंज’ के नाम पर सुनियोजित गतिविधियां चल रही हैं। भागवत ने इसे पश्चिमी प्रभाव से जुड़ी वैश्विक उथल-पुथल के संदर्भ में पेश किया।
समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

RSS Centenary : राष्ट्रहित और कर्तव्य को सर्वोच्च रखने की अपील
मोहन भागवत ने कहा कि भाषा, जाति और पंथ से जुड़ाव स्वाभाविक है, लेकिन इन सबसे ऊपर राष्ट्र के प्रति निष्ठा और अपने कर्तव्यों का बोध होना चाहिए। उनके मुताबिक, अनुशासन और राष्ट्रीयता की भावना मजबूत रहने पर ही देश प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में शामिल ‘हम भारत के लोग’ का उल्लेख करते हुए इसे देश की विविधता को एक सूत्र में बांधने वाला भावनात्मक आधार बताया। भागवत ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा विभिन्न भाषाओं, पंथों और विचारों के सम्मान का संदेश देती है।
RSS Centenary : AI और तकनीक के इस्तेमाल में नैतिकता जरूरी
संघ प्रमुख ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तकनीक अपने आप में केवल एक साधन है, लेकिन उसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य और कितने विवेक के साथ किया जा रहा है।
भागवत के अनुसार, तकनीकी प्रगति को रोका नहीं जा सकता, इसलिए नई पीढ़ी को ज्ञान के साथ नैतिक जिम्मेदारी का भी बोध कराना जरूरी है। उन्होंने आने वाली पीढ़ी को देश की भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया।
RSS Centenary : OTT प्लेटफॉर्म और युवाओं में नशे की लत पर चिंता
मोहन भागवत ने डिजिटल सामग्री के प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि युवा कई माध्यमों से मिलने वाली जानकारी को सही-गलत का पर्याप्त आकलन किए बिना ग्रहण कर सकते हैं। उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म के संदर्भ में अनुशासन और नियंत्रण की आवश्यकता पर विचार करने की बात कही।
युवाओं में नशीले पदार्थों की बढ़ती समस्या को भी उन्होंने गंभीर चिंता का विषय बताया। भागवत ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार, प्रशासन और समाज को मिलकर प्रयास करने होंगे। नई पीढ़ी में सही संस्कार और विवेक विकसित करने की जिम्मेदारी परिवार और समाज की भी है।
RSS Centenary : आंदोलन का उद्देश्य समाधान होना चाहिए
देश में विकास के साथ चुनौतियां बने रहने की बात स्वीकार करते हुए भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में समस्याओं के खिलाफ आंदोलन होना स्वाभाविक है। हालांकि, आंदोलनों का मकसद समाधान तलाशना होना चाहिए, न कि समाज में कटुता, द्वेष या विभाजन पैदा करना।
उन्होंने वंदे मातरम् को राष्ट्रीय एकता और मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना से जोड़ते हुए कहा कि इसे स्वाभिमान के साथ गाने में किसी तरह का संकोच नहीं होना चाहिए।
RSS Centenary : स्वदेशी और सांस्कृतिक पहचान पर जोर
संघ प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 वर्षों से समाज में स्वबोध, स्वदेशी और सांस्कृतिक पहचान की भावना को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने भारतीय परंपरा की उस अवधारणा का उल्लेख किया, जो संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने और विविधताओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने का संदेश देती है।
भागवत के अनुसार, विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना तथा विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखना आज दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को इन समस्याओं के समाधान की दिशा में उपयोगी बताया।
नागपुर में संघ के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी समारोह में मोहन भागवत के संबोधन का प्रमुख केंद्र राष्ट्रनिष्ठा, सांस्कृतिक पहचान, तकनीक का जिम्मेदार इस्तेमाल और वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता रहा। ‘रिजीम चेंज’ को लेकर उनकी टिप्पणी ने अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर संघ के दृष्टिकोण को सामने रखा।
RSS Centenary : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ प्रमुख के संबोधन को प्रेरणादायी बताया
A very motivating address by Param Pujya Sarsanghchalak Dr. Mohan Bhagwat Ji during the Shatabdi Varsh Shri Vijayadashami Utsav in Nagpur.
— Narendra Modi (@narendramodi) October 20, 2026
He has spoken at length on a wide range of issues including national progress and social unity, the need for self-reliance and to strengthen…
RSS Centenary : संपादकीय नजरिया
संघ प्रमुख मोहन भागवत का ‘रिजीम चेंज’ को लेकर दिया गया बयान वैश्विक राजनीति में बढ़ती अस्थिरता पर हमारे देश में गंभीर विमर्श की मांग करता है। बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों की घटनाओं ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि आंतरिक असंतोष और बाहरी प्रभाव किसी देश की राजनीतिक दिशा को किस हद तक प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, किसी भी घटनाक्रम को सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र मानने से पहले तथ्यों और प्रमाणों की पड़ताल जरूरी है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाए रखना है। बाहरी चुनौतियों का सामना केवल आशंकाओं से नहीं, बल्कि मजबूत अर्थव्यवस्था, जागरूक नागरिकों और पारदर्शी व्यवस्था से किया जा सकता है। साथ ही, तकनीक के नैतिक उपयोग और युवाओं में विवेक विकसित करने पर भागवत का जोर भी प्रासंगिक है। राष्ट्रहित की वास्तविक ताकत आलोचनात्मक सोच, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक एकजुटता के संतुलन में निहित है।
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