BY: Yoganand Shrivastva
SC Reservation After Conversion धर्म परिवर्तन कर चुके अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों को आरक्षण का लाभ मिलने या नहीं मिलने के मुद्दे पर देशभर में बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा गठित पूर्व मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन आयोग की सिफारिशों का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार आयोग अनुसूचित जातियों की वर्तमान परिभाषा में यथास्थिति बनाए रखने की सिफारिश कर सकता है।
क्या है मौजूदा व्यवस्था
SC Reservation After Conversion राष्ट्रपति (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा वर्तमान में केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े समुदायों को ही प्राप्त है। इसी आधार पर उन्हें आरक्षण और अन्य संवैधानिक लाभ मिलते हैं।
केंद्र सरकार ने के.जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित आयोग को यह जांच करने की जिम्मेदारी दी है कि क्या हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर अन्य धर्म अपनाने वाले लोगों को भी अनुसूचित जाति का दर्जा दिया जाना चाहिए।

दो दशक से लंबित है मामला
SC Reservation After Conversion धर्म परिवर्तन कर चुके दलितों को अनुसूचित जाति सूची में शामिल करने का मुद्दा लंबे समय से न्यायिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है। यह मामला दो दशकों से अधिक समय से विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन है। धर्म परिवर्तन कर चुके समुदायों की मांग है कि सामाजिक भेदभाव की स्थिति धर्म बदलने के बाद भी समाप्त नहीं होती, इसलिए उन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा और उससे जुड़े लाभ मिलते रहने चाहिए।
पहले की समितियों ने क्या कहा
SC Reservation After Conversion इस विषय पर अतीत में कई आयोगों और समितियों ने अलग-अलग सुझाव दिए हैं। सच्चर समिति ने धर्म परिवर्तन करने वालों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने का समर्थन नहीं किया था। वहीं रंगनाथ मिश्रा आयोग ने अनुसूचित जाति की सूची को धर्म-निरपेक्ष बनाने का सुझाव दिया था।
काका कालेलकर आयोग और अन्य रिपोर्टों में भी इस विषय पर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के विभिन्न समय के रुख को भी इस बहस में महत्वपूर्ण माना जाता है।
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
SC Reservation After Conversion यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। एक पक्ष का तर्क है कि अनुसूचित जाति कोटे में नए दावेदार शामिल होने से वर्तमान लाभार्थियों पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि धर्म परिवर्तन के बाद भी सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां बनी रहती हैं, इसलिए आरक्षण का लाभ जारी रहना चाहिए।
आयोग की रिपोर्ट पर टिकी नजरें
अब सभी की नजरें बालाकृष्णन आयोग की अंतिम सिफारिशों पर टिकी हैं। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार आगे कोई निर्णय ले सकती है। हालांकि फिलहाल इस विषय पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और मौजूदा व्यवस्था यथावत लागू है।
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