Madhya Pradesh Energy: मध्य प्रदेश बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 में प्रदेश की कुल स्थापित बिजली क्षमता 25,514 मेगावाट से बढ़कर 31,000 मेगावाट तक पहुंचने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को पर्याप्त, सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के साथ ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलावों पर जोर दे रही है।
राज्य सरकार के अनुसार ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के तहत किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और खेती की लागत कम करने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सरकार का फोकस पारंपरिक बिजली उत्पादन के साथ सौर ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी के विस्तार पर भी है।
Madhya Pradesh Energy: 32 हजार मेगावाट बिजली क्षमता का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश में 32,000 मेगावाट विद्युत क्षमता, 30 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी और नवीकरणीय ऊर्जा में 25 गुना वृद्धि के लक्ष्य के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सतपुड़ा एवं अमरकंटक ताप विद्युत गृह की नई इकाइयों के विस्तार का निर्णय भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश की मौजूदा और भविष्य की बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उत्पादन क्षमता को लगातार बढ़ाना है।
Madhya Pradesh Energy: बिजली उत्पादन में मध्य प्रदेश सरप्लस, भविष्य की जरूरतों पर तैयारी
मुख्यमंत्री के मुताबिक मध्य प्रदेश वर्तमान में बिजली उत्पादन के मामले में सरप्लस स्थिति में है। राज्य सरकार भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए अभी से तैयारी कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ने से केवल घरेलू और कृषि क्षेत्र को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि उद्योग और निवेश के लिए भी नए अवसर तैयार होंगे। सरकार के अनुसार GIS के बाद 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू संपन्न हुए हैं, ऐसे में आने वाले समय में ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करना महत्वपूर्ण होगा।
Madhya Pradesh Energy: ढाई साल में 7 हजार मेगावाट क्षमता बढ़ने का दावा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में बिजली उत्पादन की मौजूदा स्थिति की तुलना पिछले शासनकाल से करते हुए कहा कि कांग्रेस के 55 वर्षों के शासनकाल में प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता करीब 5,000 मेगावाट थी।
उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के प्रयासों से बीते 2.5 वर्षों में ही 7,000 मेगावाट की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। सरकार का कहना है कि बिजली उत्पादन और क्षमता में बढ़ोतरी के साथ प्रदेश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
Madhya Pradesh Energy: किसानों को 5 रुपये में स्थाई बिजली कनेक्शन
किसानों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सरकार के अनुसार किसानों को मात्र 5 रुपये में स्थाई बिजली कनेक्शन देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही सांकेतिक राशि पर स्थाई कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध कराने की पहल भी की जा रही है।
इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में बिजली कनेक्शन की उपलब्धता बढ़ाना और किसानों को सिंचाई के लिए नियमित बिजली उपलब्ध कराना है।
Madhya Pradesh Energy: सोलर पंप पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी
राज्य सरकार किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ने पर भी जोर दे रही है। सरकार के अनुसार सोलर पंप पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके तहत किसानों को कुल लागत का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च करना होगा।
सौर पंपों के विस्तार से किसानों को सिंचाई के लिए बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के साथ पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
Madhya Pradesh Energy: अटल कृषि ज्योति योजना के लिए 13,914 करोड़ रुपये
कृषि क्षेत्र में बिजली की सुचारू आपूर्ति के लिए अटल कृषि ज्योति योजना को भी महत्वपूर्ण पहल बताया गया है। इसके लिए 13,914 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।
योजना का उद्देश्य किसानों को कृषि कार्य और सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है। सरकार के अनुसार किसानों को प्रतिदिन 10 घंटे बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
Madhya Pradesh Energy: कृषि मित्र सूर्य फीडर योजना से सौर ऊर्जा को बढ़ावा
मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए कृषि मित्र सूर्य फीडर योजना पर भी काम किया जा रहा है। इसके तहत 4,022 मेगावाट के विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए समझौते किए गए हैं।
इस पहल का उद्देश्य कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ना और किसानों को बिजली की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
Madhya Pradesh Energy: पीएम-कुसुम से किसान बन रहे ऊर्जा दाता
सरकार किसानों को केवल बिजली उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक के रूप में भी विकसित करने पर जोर दे रही है। पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों के खेतों में सोलर पैनल लगाने की पहल की जा रही है।
सरकार के अनुसार इससे किसान अपनी बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ ऊर्जा उत्पादन से भी जुड़ सकते हैं। इस मॉडल को किसानों को ‘ऊर्जा दाता’ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Madhya Pradesh Energy: ओंकारेश्वर में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट
मध्य प्रदेश में बड़े स्तर पर रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स भी विकसित किए जा रहे हैं। इनमें ओंकारेश्वर का फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट प्रमुख है। इसे भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट बताया गया है।
इसके जरिए जल क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार ऐसे प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में नई पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Madhya Pradesh Energy: नीमच में पंप स्टोरेज हाइड्रो प्रोजेक्ट पर जोर
ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में मध्य प्रदेश सरकार ने नीमच में पंप स्टोरेज हाइड्रो प्रोजेक्ट को भी महत्वपूर्ण पहल बताया है। इसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन और भंडारण की क्षमता को मजबूत करना है।
सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों से मिलने वाली बिजली को प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने के लिए ऊर्जा भंडारण की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पंप स्टोरेज परियोजनाओं को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Madhya Pradesh Energy: ऊर्जा आत्मनिर्भरता से किसानों और उद्योगों को मिलेंगे नए अवसर
मध्य प्रदेश सरकार का फोकस बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने तथा ग्रीन एनर्जी के विस्तार पर है। पारंपरिक बिजली उत्पादन क्षमता के साथ सौर और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देकर राज्य को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार ऊर्जा क्षेत्र में क्षमता विस्तार से किसानों, उद्योगों और निवेश के लिए नए अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य मध्य प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में और अधिक मजबूत बनाना है।


