Iran President Sanatan Dharma : मानवता के कल्याण का संदेश देता है सनातन,आध्यात्मिक मुलाकात, संस्कृतियों-परंपराओं का संवाद
Iran President Sanatan Dharma : सनातन की शक्ति और संस्कार का प्रभाव दुनिया देख रही है। दुनिया सनातन की शक्ति और संस्कार को सम्मान दे रही है। सनातन के सम्मान में दुनिया के शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्ष भी नतमस्तक हैं। हम बात कर रहे हैं, हालही में दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मलेन के दौरान हुए एक धार्मिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सहभागिता कार्यक्रम की, जिसमें इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हिंदू धर्मगुरु जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज जी का सम्मान किया और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद भी लिया। ईरान के राष्ट्रपति ने हिंदू धर्मगुरु से सनातन की आध्यात्मिक परंपरा और मानवता का संदेश सुना, फिर जगद्गुरु स्वामी सतीश आचार्य महाराज के पैर छुए। कार्यक्रम के दौरान सनातन परंपरा के मानवीय और कल्याणकारी संदेश पर विस्तार से विचार रखे गए। जगद्गुरु सतीशाचार्य जी ने कहा कि सनातन परंपरा केवल किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के कल्याण, आपसी सद्भाव और सभी जीवों के प्रति करुणा का संदेश देती है। सनातन दर्शन में विश्व के प्रत्येक प्राणी के सुख, शांति और मंगल की कामना की गई है। अपने संदेश में जगद्गुरु सतीशाचार्य जी महराज ने कहा कि सनातन धर्म विश्व का सबसे पुराणिक धर्म इसलिए है। क्योंकि ये कहता है धर्म की जय हो, किस धर्म की जय हो ये नहीं कहता, ‘विश्व का कल्याण हो, प्राणियों में सद्भावना हो’ का भाव सनातन परंपरा की मूल भावना में शामिल है। वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अपने संबोधन में धर्म और धार्मिक शिक्षाओं के उद्देश्य को मानवता की रक्षा तथा न्याय व्यवस्था की स्थापना से जोड़ा। अब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का सनातन संत जगद्गुरु सतीशाचार्य महाराज से मिलना और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना केवल एक आध्यात्मिक मुलाकात नहीं, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों और विचार परंपराओं के बीच संवाद का प्रतीक भी है। इस मुलाकात में धर्म को मानवता, न्याय और सद्भाव से जोड़ने की बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।।।।।।।
Iran President Sanatan Dharma : मंदिरों में पूजा-अर्चना के बाद होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों, आरती और जयकारों के दौरान भी ऐसे मंगलकारी मंत्रों और प्रार्थनाओं का स्मरण किया जाता है। यह परंपरा भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जहां सनातन धर्मावलंबी रहते हैं और जहां मंदिर एवं धार्मिक केंद्र स्थापित हैं, वहां भी इस भाव को प्रार्थना के रूप में दोहराया जाता है। आध्यात्मिक संवाद से जुड़े इस कार्यक्रम में धर्म, मानवता और सामाजिक मूल्यों को लेकर चर्चा हुई। वायरल वीडियो में पेजेशकियन को जगद्गुरु सतीशाचार्य से बातचीत करने के बाद झुककर उनका आशीर्वाद लेते हुए देखा जा सकता है। सनातन परंपरा का मूल विचार किसी एक समुदाय की श्रेष्ठता स्थापित करना नहीं, बल्कि समस्त प्राणियों के कल्याण की कामना करना है। “विश्व का कल्याण हो, प्राणियों में सद्भावना हो”, “सर्वे भवन्तु सुखिनः” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” जैसे सूत्र इसी व्यापक सोच को सामने रखते हैं। आज दुनिया युद्ध, तनाव और विभाजन से गुजर रही है। ऐसे समय में धर्म यदि मानवता को जोड़ने, करुणा बढ़ाने और न्याय की स्थापना का माध्यम बने, तो यही उसकी सबसे सार्थक भूमिका होगी। यही सनातन का वैश्विक संदेश भी है।
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