BY: Yoganand Shrivastva
Exacum Loheri Flower फिलीपींस के रिजल प्रांत स्थित मसुंगी जियोरिजर्व में एक बेहद दुर्लभ फूल के दोबारा खिलने से वैज्ञानिकों और संरक्षण विशेषज्ञों में उत्साह है। एक्सकम लोहेरी नाम की इस प्रजाति को लंबे समय से विलुप्त या खोई हुई माना जाता था। अब करीब 130 साल बाद इसके कई पौधे फूलों के साथ नजर आए हैं।
1895 में हुई थी पहली खोज
Exacum Loheri Flower एक्सकम लोहेरी को पहली बार 1895 में स्विस वनस्पतिशास्त्री ऑगस्ट लोहेर ने फिलीपींस के रिजल प्रांत में खोजा था। इसके बाद यह पौधा ऐतिहासिक संग्रहों तक सीमित रह गया और लंबे समय तक जंगलों में इसके होने का कोई प्रमाण नहीं मिला।

पिछले साल मसुंगी के चूना पत्थर वाले जंगलों में घोंघों के सर्वेक्षण के दौरान शोधकर्ताओं ने इस पौधे को दोबारा खोजा था। नीले-बैंगनी रंग के छोटे फूलों की तस्वीरें भी ली गई थीं। इसे 130 से अधिक वर्षों में एक्सकम लोहेरी का पहला प्रमाणित रिकॉर्ड माना गया।
सूरज से नहीं, मिट्टी के फंगस से लेता है पोषण
Exacum Loheri Flower एक्सकम लोहेरी सामान्य पौधों से काफी अलग है। यह अक्लोरोफिलस यानी क्लोरोफिल रहित और माइकोहेटरोट्रॉफिक पौधा है। इसका मतलब है कि यह प्रकाश संश्लेषण के जरिए खुद पोषण तैयार नहीं करता, बल्कि पोषक तत्वों के लिए मिट्टी में मौजूद कवक पर निर्भर रहता है।
यही विशेषता इस पौधे को वनस्पति विज्ञान के लिहाज से बेहद अनोखा बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित फैलाव के कारण यह प्रजाति बेहद दुर्लभ और संभवतः खतरे में हो सकती है।
फिर खिले फूलों से संरक्षण की उम्मीद बढ़ी
Exacum Loheri Flower पिछले साल दोबारा खोजे जाने के करीब एक वर्ष बाद मसुंगी जियोरिजर्व के डिस्कवरी ट्रेल के किनारे एक्सकम लोहेरी के कई और पौधे फूलों के साथ मिले हैं। इससे विशेषज्ञों को उम्मीद जगी है कि यह खोई हुई प्रजाति जंगल में दोबारा फल-फूल सकती है।
मसुंगी जियोरिजर्व ने कहा है कि यह खोज याद दिलाती है कि जानी-पहचानी जगहों पर भी ऐसी प्रजातियां मौजूद हो सकती हैं, जिन्हें अभी वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण की जरूरत है। संरक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ऐसी प्रजातियों को दोबारा पनपने के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी है।


