by: mahesh nautiyal
RahulGandhi : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधा है…राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का भी जिक्र किया…उन्होंने कहा कि हमारे अध्यक्ष जब हल्द्वानी में जाते है वहां शुद्धिकरण होता है..जो बीजेपी और आरएसएस के लोग करते हैं..यह हरकत SC और ST एक्ट का उल्लंघन है…शुद्धिकरण की रस्म निभाना एक अपराध है, फिर भी, कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
RahulGandhi : उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का दावा है कि वे हर जाति से ताल्लुक रखते हैं और पूरे भारत के प्रधानमंत्री हैं.. फिर भी उनकी पार्टी के प्रमुख का कहना है कि शुद्धिकरण सही था…हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री तुरंत इन लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज करने का आदेश दें…राहुल ने कहा कि देश में दो विचारधारा के बीच की लड़ाई चल रही है.. एक अंबेडकर, गांधी जी, पटेल की विचारधारा और दूसरी आरएसएस बीजेपी की विचारधारा है…उन्होंने कहा कि दलित जितना सफल होता है, उस पर उतना बड़ा हमला होता है.
RahulGandhi : जब ये मामला पहले उठा था तो BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया था..BJP नेताओं का कहना था कि शुद्धिकरण कार्यक्रम पार्टी की ओर से नहीं किया गया था…हालांकि उत्तराखंड BJP अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि अगर कार्यक्रम के बाद धार्मिक स्थल की शुद्धता बहाल करने के लिए कोई प्रक्रिया की गई तो इसमें गलत क्या है….वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी BJP से इस घटना को जोड़ने से इनकार किया…उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसे बेवजह जातिगत मुद्दा बना रही है.
RahulGandhi : दरअसल मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक सार्वजनिक सभा की थी….इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों ने हवन कर कार्यक्रम स्थल का शुद्धिकरण किया था…उन्होंने आरोप लगाया था कि खड़गे की सभा के दौरान कुछ ऐसे नारे और टिप्पणियां की गईं, जिनसे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं….कांग्रेस ने शुद्धिकरण की इस कार्रवाई को दलित समुदाय के प्रति अपमान और भेदभाव से जोड़ा..वहीं खड़गे ने राज्यसभा में कहा था कि वह खुद को इस कार्रवाई से अपमानित महसूस करते हैं..लेकिन अब राहुल के आरोपों के बाद सियासी दल अपने अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं…
भले ही शुद्धिकरण के मामले ने एक राजनीतिक बहस का रूप ले लिया हो…लेकिन इतना जरुर है कि दलितों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा केवल पुरानी समस्या नहीं है…संविधान ने भले ही छुआछूत और भेदभाव को कानूनी रूप से खत्म किया हो…लेकिन सामाजिक स्तर पर इसको दूर नहीं किया जा सका है.




