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Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana: कलेक्टर की जांच में जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रथम दृष्टया दोषी

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Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana

Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana: सामूहिक विवाह में चांदी की जगह ‘गिल्ट’ मंगलसूत्र बांटने का आरोप, जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि

Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana: छत्तीसगढ़ की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आयोजित एक सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कथित रूप से चांदी के बजाय ‘गिल्ट’ (नकली धातु) के मंगलसूत्र वितरित किए जाने का मामला अब जांच के दायरे में है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की शिकायत पर गठित जांच समिति की रिपोर्ट में कई प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। कलेक्टर की ओर से गठित जांच समिति ने प्रथम दृष्टया शिकायत को सही माना है और संबंधित जिला कार्यक्रम अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana: जांच प्रतिवेदन के अनुसार, क्रय प्रक्रिया के दौरान कई निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि कोटेशन प्रक्रिया में आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं ली गई, क्रय समिति के हस्ताक्षर नहीं कराए गए और खरीदी गई सामग्री का भौतिक सत्यापन भी नहीं कराया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि क्रय समिति ने चांदी के मंगलसूत्र देने की अनुशंसा की थी, लेकिन कथित तौर पर अन्य धातु के मंगलसूत्र खरीदे और वितरित किए गए।

Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana: कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना, दोषियों पर कार्रवाई की मांग

Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana: मामले के सामने आने के बाद जिला कांग्रेस नेताओं ने प्रेस वार्ता कर जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग को घेरा। कांग्रेस का आरोप है कि पहले विभाग की ओर से जारी बयान में योजना को पूरी तरह सही बताया गया था, जबकि कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। पार्टी ने इसे गरीब बेटियों के सम्मान और सरकारी धन से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana: जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संबंधित जिला कार्यक्रम अधिकारी को वित्तीय नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही के लिए प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाया गया है। कलेक्टर ने जांच प्रतिवेदन को आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव को भेज दिया है। अब इस मामले में अंतिम कार्रवाई शासन स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय और विभागीय जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।