Bandhavgarh Tiger Reserve Rescue: बांधवगढ़ नेशनल पार्क में दहशत फैलाने वाला बाघ आखिरकार रेस्क्यू, वृद्ध को शिकार बनाने के बाद प्रबंधन ने बाड़े में किया बंद

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Bandhavgarh Tiger Reserve Rescue

रिपोर्ट: विकास तिवारी

Bandhavgarh Tiger Reserve Rescue मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) से लगातार आ रही बाघों के हमले की खबरों के बीच स्थानीय ग्रामीणों के लिए एक राहत भरी खबर है। पनपथा परिक्षेत्र के अमहाहार इलाके में एक बुजुर्ग ग्रामीण को अपना शिकार बनाने वाले हमलावर बाघ को पार्क प्रबंधन ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए इस बाघ को वर्तमान में बाड़े (Enclosure) में बंद कर दिया गया है।

इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद चंसुरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में फैला दहशत का माहौल अब कुछ कम हुआ है।

Bandhavgarh Tiger Reserve Rescue बाघ के हमले में 60 वर्षीय अन्नू रजक की हुई थी मौत

पिछले कुछ दिनों से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर और कोर जोन से सटे गांवों में बाघों की मूवमेंट काफी बढ़ गई है, जिसने हाल ही में एक दर्दनाक घटना का रूप ले लिया था:

  • अमहाहार में हमला: पनपथा परिक्षेत्र के अमहाहार क्षेत्र में एक बाघ ने 60 वर्षीय वृद्ध अन्नू रजक पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया।
  • मौके पर ही मौत: चंसुरा ग्राम के रहने वाले अन्नू रजक इस हमले में खुद को बचा नहीं सके और मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से ही स्थानीय ग्रामीणों में पार्क प्रबंधन के खिलाफ भारी आक्रोश और बाघ को लेकर गहरा खौफ देखा जा रहा था।

Bandhavgarh Tiger Reserve Rescue ‘आदमखोर’ होने के खतरे को देखते हुए लिया गया फैसला

वन्यजीव विशेषज्ञों और जानकारों की मानें तो यदि किसी बाघ को एक बार इंसानी खून का चस्का लग जाए या वह इंसानों को आसान शिकार मानने लगे, तो उसके ‘आदमखोर’ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में वह लगातार आबादी वाले क्षेत्रों का रुख करता है और इंसानों को अपना निशाना बनाता रहता है।

इसी गंभीर खतरे और ग्रामीणों के लगातार बढ़ते दबाव को भांपते हुए बांधवगढ़ नेशनल पार्क प्रबंधन ने इस बाघ को तुरंत खुले जंगल से हटाने की योजना तैयार की।

Bandhavgarh Tiger Reserve Rescue रेस्क्यू ऑपरेशन सफल, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

पार्क के अनुभवी डॉक्टर्स, महावतों और रेस्क्यू टीम ने पनपथा क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाकर हमलावर बाघ को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) किया और उसे सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया:

  • बाड़े में किया गया शिफ्ट: रेस्क्यू के बाद बाघ को फिलहाल पार्क के ही एक सुरक्षित बाड़े में कड़ी निगरानी में रखा गया है, ताकि उसकी गतिविधियों और व्यवहार का अध्ययन किया जा सके।
  • ग्रामीणों को मिली राहत: बाघ के पकड़े जाने की खबर जैसे ही चंसुरा और आसपास के गांवों में फैली, लोगों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों ने पार्क प्रबंधन से मांग की है कि वन्यजीवों की आबादी वाले क्षेत्रों में मॉनिटरिंग और बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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