CM Mohan Yadav Ujjain Simhastha 2028 Workshop मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार (27 जून) को बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित ‘सिंहस्थ 2016 का अनुभव, सिंहस्थ 2028 का संकल्प’ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलन कर इस विशेष कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस मंथन कार्यक्रम में उन वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबुद्ध जनों को आमंत्रित किया गया था, जिन्हें पिछले कुंभ मेलों के प्रबंधन का जमीनी अनुभव रहा है।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने महाकाल की नगरी के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया और आगामी सिंहस्थ 2028 को अभूतपूर्व व भव्य बनाने का संकल्प दोहराया।
CM Mohan Yadav Ujjain Simhastha 2028 Workshop “मनुष्य तो छोड़ो, देवताओं की भी कामना होती है उज्जैन में रहने की”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन से अपने आत्मीय और ऐतिहासिक जुड़ाव को साझा करते हुए भावुक बातें कहीं:
- जीवन धन्य करने वाली नगरी: सीएम ने कहा, “हम सब सौभाग्यशाली हैं कि हमारा संबंध उज्जैन से है। महाकाल की नगरी से जुड़ने पर जीवन धन्य हो जाता है। मनुष्य तो छोड़िए, देवताओं की भी कामना होती है कि काश उन्हें उज्जैन में रहने का अवसर मिले।”
- पीएम मोदी के नेतृत्व में बदला दौर: मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि अब वह दौर बीत गया जब लोग बड़े त्योहारों का इंतजार करते थे। अब देश में साल के 12 महीने ‘बसंत’ जैसा आनंद का उत्सव रहता है। धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है और सरकार दूरगामी परिणामों को ध्यान में रखकर नीतियां बना रही है।
- महाकाल की कृपा का जिक्र: उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “बाबा महाकाल की ही असीम कृपा है कि कोई साधारण व्यक्ति इस पावन नगरी से निकलता है और सरकार के सर्वोच्च पद (मुख्यमंत्री) पर बैठता है।”
CM Mohan Yadav Ujjain Simhastha 2028 Workshop मुख्यमंत्री ने सुनाया 1992 के सिंहस्थ का मजेदार संस्मरण
अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुभव सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन और युवावस्था के कुंभ से जुड़े रोचक संस्मरण साझा किए:

- 80 के दशक में स्काउट गाइड: सीएम ने बताया कि 80 के दशक के कुंभ में वे एक साधारण स्काउट गाइड सदस्य के रूप में मेला क्षेत्र में सेवा कर रहे थे।
- जब बुजुर्ग सहायक ने दरवाजे पर रोका: 1992 के कुंभ का एक मजेदार किस्सा सुनाते हुए उन्होंने कहा, “तब मैं सिंहस्थ समिति का सदस्य था। एक दिन मुझे कार्यालय के दरवाजे पर एक बुजुर्ग सहायक ने रोक दिया और पूछा कि कहां जा रहे हो? मैंने कहा कि मैं ही मोहन यादव हूं। इस पर वे चौंक गए और बोले- मैं तो मोहन यादव को जानता हूं, तुम्हारे बराबर तो उनके बच्चे होंगे, तुम यहां से जाओ! मैंने जैसे-तैसे उन्हें यकीन दिलाया कि मैं ही वो मोहन यादव हूं। यह सब इसलिए साझा कर रहा हूँ क्योंकि उस दौर में सिंहस्थ समिति में हर वर्ग के लोगों को जोड़ा जाता था।”
- व्यापक बनेगी समिति: उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी सिंहस्थ के लिए बनने वाली समितियों में केवल उज्जैन के ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देश के अन्य अनुभवी लोगों को भी जोड़ा जाएगा।
CM Mohan Yadav Ujjain Simhastha 2028 Workshop सिंहस्थ 2028 की चुनौतियां और सरकार का मेगा प्लान
मुख्यमंत्री ने माना कि बदलते दौर के साथ सिंहस्थ का स्वरूप और चुनौतियां दोनों बदल चुकी हैं, जिसके लिए सरकार अभी से इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रही है:
- आवास और सड़कों का चौड़ीकरण: पहले उज्जैन में केवल एक-दो होटल होते थे, लेकिन अब लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं को ठहराना बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के लिए पुराने दबावों को दूर किया जा रहा है और मेला क्षेत्र की हर सड़क को चौड़ा किया जा रहा है।
- नदी और पक्के घाटों की चुनौती: सीएम ने कहा कि क्षिप्रा नदी की धारा मिट्टी के कारण पहले अपनी दिशा बदल लेती थी, जो एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन अब पक्के घाटों के निर्माण से यह समस्या दूर हो चुकी है। इस बार धर्मशालाओं के आवंटन में भी पारदर्शिता रखी जाएगी।
- रेलवे और पड़ोसी राज्यों से समन्वय: उज्जैन में रेलवे के आधुनिकीकरण का लाभ सिंहस्थ को मिलेगा। इसके अलावा, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित सभी पड़ोसी राज्यों के साथ प्रशासनिक स्तर पर बेहतर तालमेल (समन्वय) स्थापित किया जाएगा।





