Bhagirath Choudhary MIDH Subsidy Controversy: “मैं किसान हूं, नियमों का पालन किया”: 99 लाख की सरकारी सब्सिडी मिलने पर केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने दी सफाई; विपक्ष के आरोपों को नकारा

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Bhagirath Choudhary MIDH Subsidy Controversy

Bhagirath Choudhary MIDH Subsidy Controversy केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को अपने ही मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण वाले बोर्ड से खीरे की खेती के लिए 99 लाख 60 हजार रुपये की सब्सिडी मिलने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों और आरोपों पर केंद्रीय मंत्री ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ किया कि वे राजनीति में आने से पहले एक किसान हैं और उन्होंने बिना कुछ छिपाए, पूरी तरह से सरकारी गाइडलाइंस के तहत इस सब्सिडी का लाभ लिया है।

Bhagirath Choudhary MIDH Subsidy Controversy किस योजना के तहत मिली 99 लाख की सब्सिडी?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी को यह सब्सिडी राजस्थान के पुष्कर के पास स्थित उनके निजी फार्म प्रोजेक्ट के लिए मिली है:

  • योजना का नाम: यह सब्सिडी चुनिंदा सब्जियों और फूलों की कमर्शियल खेती को बढ़ावा देने वाली योजना ‘मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर’ (MIDH) के तहत दी गई है।
  • नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB): इस योजना का संचालन ‘नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड’ करता है, जो कृषि मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाली एक स्वायत्त संस्था है।
  • प्रोजेक्ट की रूपरेखा: वर्ष 2025 में NHB द्वारा स्वीकृत 467 प्रोजेक्ट्स में मंत्रीजी का 16,592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती का प्रोजेक्ट भी शामिल था, जिसे “हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और कटाई के बाद के प्रबंधन के जरिए कमर्शियल हॉर्टिकल्चर का विकास” योजना के तहत मंजूरी दी गई थी।

Bhagirath Choudhary MIDH Subsidy Controversy सब्सिडी के बचाव में मंत्री की दलील: “बैंक से लिया 2 करोड़ का लोन”

विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने अपने प्रोजेक्ट की जरूरत और पारदर्शिता को लेकर कई अहम बातें कहीं:

  • पानी की भारी किल्लत: मंत्री ने बताया कि जहां उन्होंने यह प्रोजेक्ट लगाया है, वहां भू-जल स्तर (Water Table) लगभग खत्म हो चुका है। खेती को बचाने के लिए उन्होंने 2 करोड़ लीटर पानी की क्षमता वाले चार ‘फार्म पूल’ (कृषि तालाब) बनाए हैं, ताकि बरसात के पानी को इकट्ठा कर अपनी 60 बीघा जमीन की सिंचाई कर सकें।
  • पारदर्शिता का प्रमाण: उन्होंने कहा, “मैंने कुछ भी छिपाकर नहीं किया है। जमीन मेरे नाम पर है और सब्सिडी भी नियमों के तहत मेरे ही नाम पर मिली है। मैंने इसके लिए बैंक से 2 करोड़ रुपये का लोन लिया है। मैंने तो अपने खेत पर सब्सिडी की पूरी जानकारी वाला बोर्ड भी लगाया है, जिसमें प्रोजेक्ट की लागत और सब्सिडी की राशि साफ लिखी है।”
  • रामनाथ ठाकुर के विभाग से मिली सब्सिडी: उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सब्सिडी उन्हें कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले रामनाथ ठाकुर के विभाग की गाइडलाइंस के तहत मिली है।

Bhagirath Choudhary MIDH Subsidy Controversy “इंडस्ट्री लगाने पर सब्सिडी मिल सकती है, तो किसान को क्यों नहीं?”

विपक्ष पर पलटवार करते हुए भागीरथ चौधरी ने कहा कि खेती में नई तकनीक का इस्तेमाल करना कोई अपराध नहीं है:

  • समान अधिकार का तर्क: उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई व्यक्ति राजनीति में रहकर उद्योग (इंडस्ट्री) लगाता है, तो उसे भी सरकारी नियमों के तहत सब्सिडी मिलती है। एक किसान होने के नाते उन्हें भी नई तकनीक से उन्नत खेती करने का पूरा अधिकार है।
  • सब्सिडी का उदाहरण: उन्होंने कहा कि देश में डीएपी (DAP) की बोरी से लेकर यूरिया खरीदने तक, हर चीज पर सरकार किसानों को सब्सिडी देती है।

किसानों के लिए प्रेरणा: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य आधुनिक और जल-संरक्षण आधारित खेती के जरिए राजस्थान के अन्य किसानों को भी प्रेरित करना है। विपक्ष का काम केवल आरोप लगाना है, लेकिन उन्होंने पूरी मेहनत और तय सरकारी स्कीम के मापदंडों पर खरे उतरकर ही यह सब्सिडी प्राप्त की है।

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