संवाददाता- प्रताप सिंह बघेल
Hirapura Panchayat Child Labor मध्य प्रदेश सरकार भले ही बाल श्रम को रोकने और बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए कड़े कानून बनाने के दावे करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। सबलगढ़ तहसील की हीरापुरा पंचायत से कानून की धज्जियां उड़ाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ खुद जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि (सरपंच) ने चंद पैसे बचाने के लालच में मासूम बच्चों को नाले की गंदगी साफ करने के काम में झोंक दिया। इस अमानवीय कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है।
Hirapura Panchayat Child Labor बारिश से पहले नाला खुलवाने के लिए पड़ोसी गांव से बुलाए मासूम
Hirapura Panchayat Child Labor यह पूरा मामला सबलगढ़ जनपद की हीरापुरा ग्राम पंचायत का है। जानकारी के मुताबिक, आगामी मानसून और बारिश के सीजन को देखते हुए गांव के बंद पड़े नाले की सफाई कराई जानी थी। इस काम के लिए भारी-भरकम मशीनों या वयस्क मजदूरों को लगाने के बजाय, हीरापुरा के सरपंच वीरेंद्र जाटव ने एक शॉर्टकट अपनाया। आरोप है कि सरपंच पड़ोसी गांव से 10 से 14 वर्ष की उम्र के तीन नाबालिग लड़कों को काम पर लेकर आए और उनसे नाले की कीचड़ साफ करवाने लगे।
Hirapura Panchayat Child Labor सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, अधिकारियों में मची खलबली
गंदगी के बीच घुटनों तक डूबे बच्चों का नाला साफ करते हुए किसी ग्रामीण ने वीडियो बना लिया, जो अब इंटरनेट पर तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। वीडियो सामने आते ही प्रशासनिक अधिकारी सकते में आ गए हैं। इस मामले पर संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत के सीईओ कमलेश भार्गव ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बाल मजदूरी करवाना एक कानूनन गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। इस वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कराई जा रही है और मामला सही पाए जाने पर दोषी सरपंच के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
Hirapura Panchayat Child Labor चंद रुपयों के लालच में मासूमों के बचपन से खिलवाड़
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह पूरा खेल महज बजट और पैसा बचाने के लिए खेला गया। ग्रामीण इलाकों में वयस्क मजदूरों की तुलना में बाल मजदूर बेहद कम दाम और आधी मजदूरी पर आसानी से मिल जाते हैं। सरपंच ने इसी लालच में नियमों और मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रख दिया। अब देखना यह होगा कि इस मामले में प्रशासन केवल जांच के दिलासे देता है या फिर बच्चों के हक को मारने वाले जिम्मेदार जनप्रतिनिधि पर कोई ठोस एक्शन लिया जाता है।





