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Agra : ताजमहल में सुरक्षा एजेंसियों का ‘मेगा मॉक ड्रिल’: संदिग्ध घुसपैठ और आगजनी से निपटने का अभ्यास; फायर पंप रूम में मिली तकनीकी खामी

Agra

Report: Farhan khan

Agra : विश्व धरोहर ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाए रखने और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार (29 मई 2026) को ताजमहल परिसर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ा संयुक्त मॉक ड्रिल (SST- अभ्यास) अभियान चलाया। इस दौरान संभावित आतंकी हमलों, संदिग्ध घुसपैठ और अचानक आगजनी जैसी आपातकालीन स्थितियों को कृत्रिम रूप से निर्मित कर सुरक्षा बलों के रिस्पॉन्स टाइम को मापा गया। इस हाई-प्रोफाइल अभ्यास में सीआईएसएफ (CISF) सहित स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्ते की कई इकाइयों ने हिस्सा लिया।

Agra तीन चरणों में हुआ अभ्यास: घुसपैठ का प्रयास किया गया नाकाम

ताज परिसर की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को जांचने के लिए कुल 3 अलग-अलग प्रकार की मॉक ड्रिल आयोजित की गईं:

  • एंटी-इन्ट्रूजन ड्रिल (संदिग्ध घुसपैठ): स्मारक के संवेदनशील घेरे में अचानक कुछ संदिग्ध तत्वों द्वारा घुसपैठ का प्रयास किया गया। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सीआईएसएफ और ताज सुरक्षा पुलिस की क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) ने मोर्चा संभाला और आधुनिक रणनीति का उपयोग करते हुए घुसपैठियों को तुरंत दबोच लिया।
  • फायर सुरक्षा व रिस्पॉन्स ड्रिल: ताजमहल के ईस्ट गेट (पूर्वी द्वार) पर अचानक आग लगने की एक काल्पनिक आपात स्थिति बनाई गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम दलबल और फायर टेंडर्स के साथ मौके पर पहुंची और सफलता पूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास किया।

Agra जांच में खुली पोल: प्रेशर बनाने में फेल हुआ फायर पंप रूम

मिली तकनीकी खामी: इस सुरक्षा अभ्यास के दौरान सुरक्षा और राहत कार्यों की एक बड़ी कमी भी उजागर हुई है। ड्रिल के दौरान जब मुख्य फायर पंप रूम का परीक्षण किया गया, तो वह तकनीकी रूप से पानी का आवश्यक प्रेशर (दबाव) बनाने में पूरी तरह असफल साबित हुआ। सुरक्षा अधिकारियों ने इसे एक गंभीर चूक माना है। इस तकनीकी खराबी को तुरंत दुरुस्त करने और व्यवस्था में सुधार लाने के लिए संबंधित विभाग को एक कड़ा आधिकारिक पत्र भेजा जा रहा है।

Agra इन प्रमुख सुरक्षा इकाइयों ने संभाला मोर्चा

Agra ताजमहल की त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित इस मॉक ड्रिल में कई विभागों के विशेषज्ञ और जवान शामिल हुए:

  1. सीआईएसएफ (CISF): मुख्य आंतरिक सुरक्षा बल।
  2. फायर सर्विस: आगजनी और आपातकालीन रेस्क्यू टीम।
  3. बम डिस्पोजल स्क्वाड (BDS): संदिग्ध वस्तुओं की जांच हेतु।
  4. डॉग स्क्वाड: परिसर में चेकिंग और ट्रैकिंग के लिए।
  5. प्रादेशिक आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC) व स्थानीय पुलिस: बाहरी सुरक्षा घेरे को संभालने वाली इकाइयां।

अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार की नियमित मॉक ड्रिल से सुरक्षा बलों की आपसी ट्यूनिंग बेहतर होती है और वास्तविक संकट के समय बिना समय गंवाए पर्यटकों और स्मारक को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है।

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