प्रयागराज बड़ा उदासीन अखाड़े का शोभा यात्रापथर चट्टी से निकाल कर जॉनसेन गंज चौक घंटाघर लोकनाथ बहादुरगढ़ होते हुए मेला क्षेत्र में देर शाम प्रवेश , करेगी इस पेशवाई में साधु संत नागा साधु घोड़े और हाथी पर सवार होकर चल रहे थे जैसा कि इस अखाड़े का नाम बड़ा उदासीन है उसी तरह भव्य और विशाल , शोभा यात्रा निकाली गई यात्रा में काई दर्जन डीजे बैंड पार्टी ढोल ताशा पार्टी पंजाबी डांस सहारनपुर हरिद्वार प्रतापगढ़ बुलंदशहर कानपुर वाराणसी से इन लोग को बुलवाया गया है, डीजे पर भक्ति गीत बज रहे थे मानो तो मैं गंगा मां हूं ना मानो तो बहता पानी कोई वजू करें मेरे जल से पंडित प्यास बुझाये, हर कोई कमर मटका रहा था कोई कमर थिरका, रहा था थे, और नोटों की बारिश होती रही दर्जनों कलात्मक चौकिया अपने प्रदर्शन से प्रयागराज के नागरिकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही थी यात्रा के पूरे रास्ते सड़क दोनों तरफ खड़े लोग साधु संतों का इंतजार कर रहे थे मकान दुकान छतो, खिड़कियों से फूलों की वर्षा हो रही थी साधु संत सभी को आशीर्वाद देते चल रहे थे हर कोई चरण स्पर्श करना चाहता था जॉनसन गंज चौक घंटाघर लोकनाथ तक व्यापारियों ने साधु संतों का स्वागत के लिए बड़ा इंतजाम कर रखा था उनके स्वागत से साधु संतो के चेहरे पर मुस्कान थी, या पेशवाई महाकुंभ की आखिरी पेशवाई है कोतवाली पुलिस सुबह से मुस्तैद थी साधु संतो से ख्याल रखा जा रहा था संगम में प्रवेश करने के बाद कुंभ मेले की पुलिस प्रशासन ने उनका स्वागत अभिनंदन किया।





