Bhopal मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने २१ मई को प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता से ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की भावुक अपील की है। मुख्यमंत्री ने अपने विशेष संदेश में प्रसिद्ध कवि रहीम के कालजयी दोहे “रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून…” का उल्लेख करते हुए जल की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सनातन और भारतीय संस्कृति में पानी का स्थान सर्वोपरि है और समाज के सहयोग के बिना इतना बड़ा पर्यावरण अनुष्ठान सार्थक नहीं हो सकता। इसी कड़ी में २५ मई को ‘मप्र जन अभियान परिषद’ द्वारा पूरे सूबे में एक बड़ा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
Bhopal ‘नदियों के मायके’ में गुड़ी पड़वा से 30 जून तक महा-अभियान, गंगा दशहरे पर होगा श्रमदान
Bhopal मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संचय के विजन को आगे बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गुड़ी पड़वा से शुरू हुआ यह व्यापक ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ आगामी ३० जून २०२६ तक निरंतर चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश २५० से अधिक नदियों का मायका है, इसलिए जल स्रोतों को सहेजना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। गंगा दशमी (गंगा दशहरा) के पावन अवसर पर पूरे प्रदेश में एक साथ सभी कुओं, ऐतिहासिक बावड़ियों, नहरों, नदियों और तालाबों की साफ-सफाई के लिए व्यापक स्तर पर सामूहिक श्रमदान किया जाएगा।

Bhopal सीएम ने किया पोस्टर का विमोचन, जन अभियान परिषद गांव-गांव निकालेगी कलश यात्रा
इस महा-अभियान को गति देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा आयोजित होने वाली ‘जल स्रोत पूजन’ और ‘गंगा कलश यात्रा’ के आधिकारिक पोस्टर का विमोचन किया। परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, स्थानीय कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायतों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं को जोड़कर इस यात्रा को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। इस यात्रा के जरिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार और उनके संरक्षण की प्रतिज्ञा दिलाई जाएगी।
Bhopal एनएसएस और सामाजिक संगठन जगाएंगे अलख, बदले मौसम के बीच जल चेतना जरूरी
बदलते पर्यावरण और ग्लोबल वार्मिंग के दौर में पानी के संकट पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जल चेतना का प्रसार करना बेहद जरूरी हो गया है। इस अभियान के तहत जन अभियान परिषद के सहयोगी नेटवर्क— प्रस्फुटन समिति, नवांकुर सखी, सीएमसीएलडीपी (CMCLDP) के छात्र-परामर्शदाता, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवक, विभिन्न स्वैच्छिक संगठन तथा सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक मंचों के माध्यम से समाज के हर वर्ग को पानी बचाने के इस पुनीत कार्य से जोड़ा जाएगा।





