Ranchi झारखंड में करीब ढाई दशक के लंबे इंतजार के बाद ‘पंचायत उपबन्ध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियमावली, 2025’ यानी पेसा (PESA) कानून को अमलीजामा पहना दिया गया है। इस ऐतिहासिक कानून के जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन और आ रही व्यावहारिक बाधाओं को दूर करने के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन के एनेक्सी सभागार में एक दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के सभी पेसा जिलों के उप विकास समाहर्ता (DDC), बीडीओ (BDO) और सीओ (CO) सहित तमाम आला अधिकारी शामिल हुए।

Ranchi पारंपरिक ग्राम सभा को अधिकार दिलाना प्राथमिकता, भ्रम फैलाने वालों को मिलेगा जवाब
कार्यशाला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्रीमती दीपिका पाण्डेय सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दिशा-निर्देश पर राज्य की पारंपरिक ग्राम व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। देश के 10 राज्यों की तुलना में झारखंड का पेसा कानून सबसे बेहतर और प्रभावी है। उन्होंने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि कुछ जगहों पर इस कानून को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है, जिससे निपटने के लिए इसके प्रावधानों का गहन अध्ययन जरूरी है। गांव के लोगों की हर समस्या और सवाल का सटीक जवाब इस नियमावली के पन्नों में मौजूद है।

Ranchi तीन महीने में होगी पारंपरिक ग्राम प्रधानों की नियुक्ति, राजस्व और पारंपरिक व्यवस्था में समझें अंतर
पंचायती राज मंत्री ने फील्ड में तैनात अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि पारंपरिक व्यवस्था के तहत आगामी तीन महीने के भीतर सभी ग्राम प्रधानों की नियुक्ति प्रक्रिया को हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिकारियों को ‘पारंपरिक ग्राम प्रधान’ और ‘राजस्व ग्राम प्रधान’ के बीच के बारीक अंतर को अच्छी तरह समझना होगा। पेसा कानून के तहत पारंपरिक तरीके से ही ग्राम सभा के जरिए ग्राम प्रधान का चयन लोकतांत्रिक और पारदर्शी ढंग से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
Ranchi क्षेत्रीय भाषाओं में हुआ नियमावली का अनुवाद, 125 मास्टर ट्रेनर गांव-गांव में देंगे ट्रेनिंग
पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने कार्यशाला में बताया कि पेसा कानून की बारीकियों को आम आदिवासियों और ग्रामीणों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए पूरी नियमावली का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद कराया गया है। कानून के प्रचार-प्रसार और जागरूकता के लिए राज्यभर में 125 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं, जो सुदूर ग्रामीण इलाकों में जाकर प्रशिक्षण देंगे। इसके साथ ही, पंचायती राज निदेशालय की निदेशक श्रीमती बी. राजेश्वरी की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी बनाई गई है, जो इस कानून को लागू करने में आ रही शुरुआती चुनौतियों और स्थानीय पारंपरिक न्याय व्यवस्था का गहन अध्ययन कर रही है ताकि आने वाली बाधाओं को तुरंत दूर किया जा सके।





