BY
Yoganand Shrivastava
Gwalior । एमिटी यूनिवर्सिटी मध्य प्रदेश के पर्यावरण विज्ञान विभाग और स्कूल ऑफ फैशन डिजाइन द्वारा आयोजित चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (ICEST 2026) शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। ‘पर्यावरणीय स्थिरता और प्रौद्योगिकी’ पर केंद्रित इस एक दिवसीय कार्यक्रम में नगर निगम ग्वालियर की ब्रांड एंबेसडर और प्रसिद्ध ‘वॉटर वूमन’ सावित्री श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुईं। उन्होंने अपने संबोधन से छात्रों और शोधकर्ताओं में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया।

Gwalior तकनीकी नवाचार और सतत विकास पर मंथन
सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने एक जिम्मेदार और पुनर्योजी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर जोर दिया। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि कैसे तकनीकी नवाचारों के माध्यम से हम सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त कर सकते हैं। इस अवसर पर आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी में पर्यावरण संरक्षण के वैश्विक स्तर पर अपनाए जा रहे श्रेष्ठ उपायों और मॉडलों को प्रदर्शित किया गया, जिसे प्रतिभागियों ने काफी सराहा।

Gwalior आधुनिक शोध के साथ पारंपरिक कला का संगम
ICEST 2026 के सत्रों में न केवल वैज्ञानिक शोधों पर चर्चा हुई, बल्कि पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों ने तर्क दिया कि सांस्कृतिक स्थिरता और स्थानीय कारीगरों की आजीविका को सुरक्षित करने के लिए हस्तशिल्प का आधुनिकीकरण अनिवार्य है। विश्वविद्यालय के इस अनूठे प्रयास ने शोध और रचनात्मक विचारों के मिलन को भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी समाधान बताया।

Gwalior 200 से अधिक विशेषज्ञों ने तैयार किया भविष्य का रोडमैप
इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश के लगभग 200 से अधिक शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के समापन सत्र में पर्यावरण चेतना को जमीनी स्तर पर ले जाने के लिए एक स्पष्ट ‘रोडमैप’ तैयार किया गया। मुख्य अतिथि सावित्री श्रीवास्तव के जल संरक्षण के अनुभवों ने सत्र को और भी प्रेरणादायी बना दिया, जिससे युवा शोधार्थियों को भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए नए दृष्टिकोण मिले।
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