रिपोर्ट: संजीव कुमार शर्मा
Sultanganj Deoghar Railway Overbridge Damage बिहार के भागलपुर जिले में अभी विक्रमशिला सेतु (विक्रमशिला पुल) की ट्रैफिक और मरम्मत से जुड़ी समस्याएं पूरी तरह सुलझी भी नहीं थीं कि अब सुल्तानगंज में एक और प्रमुख ओवरब्रिज पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। सुल्तानगंज-देवघर मार्ग पर स्थित रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के अत्यधिक जर्जर और असुरक्षित होने के कारण पथ निर्माण विभाग (RCD) प्रमंडलीय भागलपुर ने इस मार्ग पर भारी वाहनों के परिचालन को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
Sultanganj Deoghar Railway Overbridge Damage 4 से 5 दिनों के भीतर लगेगा हाइट बैरियर, केवल छोटी गाड़ियां गुजरेंगी
मौके पर मुआयना करने पहुंची पथ निर्माण विभाग की टीम के सदस्य और जूनियर इंजीनियर (JE) शोएब अंसारी ने प्रशासनिक तैयारियों की पुष्टि की। उन्होंने बताया:
“सुल्तानगंज-देवघर मार्ग पर बने रेलवे ओवरब्रिज की हालत वर्तमान में काफी जर्जर हो चुकी है। किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए इस मार्ग से भारी और बड़े वाहनों की आवाजाही को रोकना बेहद जरूरी हो गया है। इसके लिए विभाग द्वारा आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। अगले चार से पांच दिनों के भीतर पुल के दोनों ओर लोहे के मजबूत बैरियर (Height Barriers) लगा दिए जाएंगे। जब तक रेलवे ओवरब्रिज की मुकम्मल मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक इस रूट पर बड़ी गाड़ियों के परिचालन पर पूरी तरह रोक रहेगी।”
Sultanganj Deoghar Railway Overbridge Damage बिहार में गिरते-डैमेज होते पुलों के बीच प्रशासन बरत रहा एहतियात
विगत कुछ समय से बिहार के अलग-अलग जिलों से लगातार पुलों के ढहने या क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन किसी भी तरह की बड़ी मानवीय या ढांचागत त्रासदी का जोखिम नहीं उठाना चाहता। सावन के करीब आते ही इस मार्ग पर कांवरियों और वाहनों का दबाव बढ़ने लगता है, जिसे देखते हुए विभाग समय रहते अलर्ट मोड पर आ गया है। इस दौरान विभाग के कई तकनीकी कर्मी और अधिकारी ओवरब्रिज की लोड क्षमता का आकलन करने के लिए मौके पर मुस्तैद दिखे।

Sultanganj Deoghar Railway Overbridge Damage ‘ड्यूटी पूरी करने’ से अलग, पुलों की सेहत सुधारने के लिए गंभीर हो सरकार
बात केवल बैरियर लगाकर भारी वाहनों को रोकने और अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर लेने भर की नहीं है। आम जनता और विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अचानक लगाए जाने वाले प्रतिबंधों से परिवहन व्यवस्था चरमरा जाती है और स्थानीय कारोबारियों व आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सरकार और संबंधित तकनीकी विभागों को इस बुनियादी समस्या की गहराई में जाना होगा कि आखिर राज्य में बने पुल-पुलिया इतनी जल्दी जर्जर या डैमेज क्यों हो रहे हैं?
अब देखने वाली बात यह होगी कि सूबे की मौजूदा डबल इंजन सरकार बिहार की लाइफलाइन माने जाने वाले इन पुलों की सेहत सुधारने और बुनियादी ढांचे को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने के लिए कब तक कोई ठोस, पारदर्शी और प्रभावी नियंत्रण नीति लागू कर पाती है।





