संवाददाता- राजेंद्र बिल्लौरे
Harda मध्य प्रदेश के हरदा जिले में खनिज माफिया के हौसले बुलंद हैं। सिराली तहसील के ग्राम महेंद्र गांव खुटवाल में तालाब निर्माण की अनुमति की आड़ में सरकारी भूमि को छलनी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। माफिया न केवल राजस्व को चूना लगा रहे हैं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर ग्रामीणों और मवेशियों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं।
Harda निजी जमीन की अनुमति और सरकारी धरा पर कब्जा
मामले की गहराई में जाने पर पता चलता है कि यहाँ खसरा नंबर 15 की पौने दो एकड़ निजी भूमि में से केवल एक एकड़ में तालाब खुदाई की वैधानिक अनुमति ली गई थी। खनिज विभाग ने करीब 2000 घन मीटर मिट्टी निकालने की परमिशन दी थी। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है; खनन माफिया ने निजी क्षेत्र को छोड़कर सड़क किनारे स्थित बहुमूल्य सरकारी जमीन को खोदना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब खनिज विभाग की कथित मिलीभगत और साठ-गांठ के बिना संभव नहीं है।
Harda सुरक्षा मानकों की अनदेखी: बन गए ‘मौत के गड्ढे’
माइनिंग नियमों के अनुसार, उत्खनन स्थल पर तार फेंसिंग और चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सड़क के बिल्कुल किनारे किए गए गहरे गड्ढे अब राहगीरों और पशुओं के लिए काल बन गए हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि बिना किसी सुरक्षा घेरे के जारी इस अवैध कार्य की वजह से कभी भी कोई मासूम बच्चा या मवेशी इन गड्ढों का शिकार हो सकता है। ट्रकों के माध्यम से मिट्टी का अवैध परिवहन भी बेखौफ जारी है।
Harda प्रशासन ने साधी चुप्पी, अब जांच का भरोसा
जब यह मामला मीडिया के जरिए सुर्खियों में आया, तब जाकर प्रशासनिक अमला हरकत में दिखा। सिराली तहसीलदार विजय साहू ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित क्षेत्र से बाहर या सरकारी जमीन पर खुदाई की पुष्टि होती है, तो मौका मुआयना कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जिला खनिज अधिकारी प्रगति सोनवाने ने भी टीम भेजकर जांच कराने की बात कही है। हालांकि, सवाल अब भी बरकरार है कि इतना बड़ा उत्खनन अधिकारियों की नजरों से अब तक ओझल कैसे रहा?
Read this: Political Defection: अंबाला में AAP को बड़ा झटका, वार्ड 7 उम्मीदवार लक्ष्मी देवी BJP में शामिल





