Report: Devendra Jaiswal
Indore बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर इंदौर की सेंट्रल जेल में खुशियों का माहौल देखा गया। जेल प्रबंधन ने शासन की मंशा के अनुरूप और उनके अच्छे आचरण को देखते हुए 6 कैदियों को रिहा करने का निर्णय लिया। ये कैदी अब जेल की चारदीवारी से निकलकर नए जीवन की शुरुआत करेंगे।
Indore अच्छे आचरण और आधी सजा पूरी करने पर मिली मुक्ति
शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रदेश में वर्ष में पांच विशेष अवसरों—15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस), 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), जनजातीय गौरव दिवस, अंबेडकर जयंती और गांधी जयंती पर कैदियों की रिहाई की जाती है। इस बार अंबेडकर जयंती पर उन कैदियों को चिन्हित किया गया, जिन्होंने अपनी आधी से अधिक सजा पूरी कर ली थी और सजा काल के दौरान जिनका व्यवहार और चाल-चलन उत्कृष्ट रहा।
Indore ₹1 लाख से अधिक का पारिश्रमिक लेकर हुए विदा
जेल से रिहा होने वाले कैदी खाली हाथ घर नहीं लौटे। जेल के भीतर विभिन्न उद्योगों और कार्यों में श्रम करने के बदले उन्हें उनका पारिश्रमिक दिया गया। रिहा हुए कैदियों को कुल मिलाकर ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) से अधिक की राशि सौंपी गई। यह राशि उनके भविष्य के पुनर्वास और स्वरोजगार शुरू करने में मददगार साबित होगी।
Indore स्वरोजगार का प्रशिक्षण देकर समाज की मुख्यधारा में जोड़ने की पहल
जेल प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य कैदियों को केवल सजा देना नहीं, बल्कि उनका सुधार करना है। जेल अधीक्षक के अनुसार, सजा के दौरान इन कैदियों को विभिन्न ट्रेडों में व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि जेल से बाहर निकलने के बाद ये लोग समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें और अपने हुनर के दम पर स्वरोजगार कर सम्मानित जीवन जी सकें। रिहा हुए कैदियों ने भी संकल्प लिया कि वे अब अपराध की दुनिया को छोड़कर बेहतर नागरिक बनेंगे।





