Bhopal बाबा महाकाल और सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जैन एक बार फिर खगोल विज्ञान और काल गणना की वैश्विक धुरी बनने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार, 3 अप्रैल को तारामंडल परिसर में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही उज्जैन को 15 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक साइंस सेंटर की सौगात भी मिलेगी।

Bhopal ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ सम्मेलन की मुख्य बातें
यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के अनूठे संगम पर केंद्रित है।
- प्रमुख अतिथि: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन और प्रसिद्ध विचारक सुरेश सोनी उद्घाटन सत्र की शोभा बढ़ाएंगे।
- प्रतिभागी: इसरो, डीआरडीओ (DRDO), नीति आयोग और टोक्यो विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के दिग्गज वैज्ञानिक और शोधकर्ता यहाँ अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
- विषय: सम्मेलन में स्पेस इकोनॉमी, एस्ट्रोफिजिक्स, भारतीय काल गणना का वैज्ञानिक आधार और कालचक्र की अवधारणा पर गहन मंथन होगा।
Bhopal उज्जैन-डोंगला को ‘ग्लोबल मेरिडियन’ बनाने की तैयारी
उज्जैन से लगभग 35 किमी दूर स्थित डोंगला खगोलीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से कर्क रेखा गुजरती है।

- वैश्विक मध्यान्ह रेखा: सम्मेलन में डोंगला को दुनिया की मुख्य मध्यान्ह रेखा (Global Meridian) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
- लक्ष्य: राज्य सरकार उज्जैन को पुनः दुनिया के ‘टाइम स्केल सेंटर’ के रूप में प्रतिष्ठित करना चाहती है, जैसा कि प्राचीन काल में आचार्य वराहमिहिर के समय में था।
Bhopal ₹15 करोड़ का नया साइंस सेंटर: युवाओं के लिए नवाचार का केंद्र
मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पित होने वाला नया साइंस सेंटर विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए एक वरदान साबित होगा।
- सुविधाएं: यहाँ गैलरी ऑन साइंस, आउटडोर साइंस पार्क, इनोवेशन लैब और हेरिटेज थीम आधारित गैलरी विकसित की गई हैं।
- कार्यशालाएं: सम्मेलन के दौरान युवाओं के लिए UAV (ड्रोन), सैटेलाइट निर्माण और रिमोट कंट्रोल तकनीक पर विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
- आकाश दर्शन: टेलीस्कोप के जरिए रात्रि आकाश का अध्ययन और सूर्य के सन-स्पॉट का सुरक्षित अवलोकन भी आकर्षण का केंद्र होगा।
Bhopal सिंहस्थ-2028 और भविष्य का विज़न
यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

- साइंस सिटी: उज्जैन को भविष्य में एक बड़ी ‘साइंस सिटी’ के रूप में विकसित करने की योजना है।
- प्रदर्शनी: टेक्नोलॉजी एक्सपो में ब्रह्मोस एयरोस्पेस, आईआईटी इंदौर और सीएसआईआर (CSIR) अपनी तकनीकी उपलब्धियों का प्रदर्शन करेंगे।
मुख्यमंत्री का विज़न: “उज्जैन प्राचीन काल से ही विज्ञान और खगोल का केंद्र रहा है। इस सम्मेलन के माध्यम से हम वराहमिहिर की विरासत और डॉ. विक्रम साराभाई के आधुनिक विज़न को एक साथ जोड़कर भारत को अंतरिक्ष विज्ञान में विश्व गुरु बनाने की ओर अग्रसर हैं।”





