BY
Yoganand Shrivastava
UP news: गाजियाबाद पुलिस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पुलिस अधिकारी एक व्यक्ति की पीठ के पास मोबाइल फोन ले जाकर उसे स्कैन करता दिख रहा है। वीडियो में दिखाई गई यह प्रक्रिया लोगों के बीच विवाद और चर्चा का विषय बन गई। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे अपमानजनक और अवैज्ञानिक बताया, जबकि कुछ ने पुलिस से सफाई मांगी।
इस घटना का संबंध 23 दिसंबर से है। वीडियो में दिखाई गई व्यक्ति की भाभी रोशनी खातून ने बताया कि उस दिन स्थानीय थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे थे। उनका उद्देश्य वेरिफिकेशन था। पुलिस ने परिवार से आधार कार्ड और कानूनी दस्तावेज दिखाने के लिए कहा। पुलिसकर्मियों ने यह दावा किया कि उनके पास एक ऐसी तकनीक है जो बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर सकती है, लेकिन असल में उनके पास कोई विशेष मशीन नहीं थी। केवल मोबाइल फोन हाथ में लेकर पीठ पर हल्का स्पर्श किया गया।
रोशनी ने यह भी बताया कि पुलिस ने उनके परिवार को कोई धमकी नहीं दी और न ही गालियां दीं। उनका परिवार इस इलाके में 1986 से रह रहा है और मूल रूप से बिहार के अररिया का निवासी है।
गाजियाबाद पुलिस ने वीडियो वायरल होने के बाद कहा कि अधिकारी को इस तरह की प्रक्रिया दोहराने से रोक दिया गया है और इस घटना पर उचित ध्यान दिया गया है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई नागरिक वेरिफिकेशन के तहत की गई थी, न कि किसी तरह की अपमानजनक तकनीक के लिए।





