BY: Yoganand Shrivastava
Kerala news: केरल में वर्ष 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे सामने आ रहे हैं और इसी बीच कांग्रेस की युवा नेता वैश्ना सुरेश की जीत ने राज्य की राजनीति में खास चर्चा पैदा कर दी है। तिरुवनंतपुरम नगर निगम के मुट्टाडा वार्ड से चुनाव लड़ते हुए वैश्ना सुरेश ने न केवल सीपीएम की मजबूत सीट पर कब्जा किया, बल्कि एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई को भी जीत में बदल दिया। उनकी यह सफलता इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि चुनाव से ठीक पहले उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था।
वैश्ना सुरेश मूल रूप से तिरुवनंतपुरम की रहने वाली हैं और उन्होंने संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया था। चुनावी प्रक्रिया के दौरान जब उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं पाया गया, तब यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। कांग्रेस ने इसे एक साजिश करार दिया, जबकि वैश्ना ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कानूनी रास्ता अपनाया।
मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद वैश्ना सुरेश ने केरल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग के नोटिस को चुनौती दी और यह दलील दी कि बिना ठोस कारण के उनका नाम हटाया गया है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए कि वैश्ना के दावे की दोबारा समीक्षा की जाए। अदालत के निर्देशों के बाद निर्वाचन आयोग ने सुनवाई की और अंततः उनका नाम फिर से मतदाता सूची में शामिल कर दिया गया।
नाम बहाल होने के बाद वैश्ना सुरेश ने पूरे आत्मविश्वास के साथ चुनाव प्रचार किया। उन्होंने स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखते हुए मतदाताओं से संवाद किया और जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ साबित की। चुनाव परिणामों में उन्होंने करीब 300 से अधिक मतों के अंतर से सीपीएम उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की। यह परिणाम इसलिए भी चौंकाने वाला रहा, क्योंकि मुट्टाडा वार्ड को लंबे समय से वामपंथ का मजबूत गढ़ माना जाता था।
जीत के बाद मीडिया से बातचीत में वैश्ना सुरेश ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह परिणाम दिखाता है कि सच्चाई और संघर्ष के रास्ते पर चलने वालों की आखिरकार जीत होती है। उनका कहना था कि इस पूरे घटनाक्रम में उन्हें जनता का भरपूर समर्थन मिला और लोगों ने उनकी मेहनत व ईमानदारी को पहचाना। कांग्रेस नेताओं ने भी इस जीत को पार्टी के लिए प्रेरणादायक बताया।
वैश्ना सुरेश की यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं है, बल्कि यह उस कानूनी संघर्ष की भी जीत है, जो उन्होंने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लड़ा। चुनाव से पहले नाम हटने जैसी बाधा के बावजूद उन्होंने पीछे हटने के बजाय न्यायपालिका पर भरोसा किया और अंततः उसी संघर्ष ने उन्हें राजनीतिक सफलता दिलाई। यही कारण है कि उनकी जीत को राज्य की राजनीति में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
यदि वैश्ना सुरेश के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो वह पेशे से एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत युवा कांग्रेस से की थी। वे लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास जैसे मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करती रही हैं। स्थानीय स्तर पर जनता से जुड़ाव और जमीनी समस्याओं पर फोकस ही उनकी राजनीति की पहचान रही है।
केरल निकाय चुनाव 2025 में वैश्ना सुरेश की जीत यह संदेश देती है कि लोकतंत्र में चुनौतियां चाहे जितनी भी बड़ी हों, यदि संकल्प मजबूत हो तो उन्हें अवसर में बदला जा सकता है। उनकी कहानी न सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए, बल्कि देशभर के युवा नेताओं के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरी है।





