Fuel Saving Appeal : अब देशभर में गैरजरूरी खर्चों में कटौती को प्राथमिकता ,संकट में राष्ट्रहित का संदेश, गंभीरता से पालन कर रहा देश
Fuel Saving Appeal : देश जब किसी बड़े वैश्विक, आर्थिक या सामरिक चुनौती के दौर से गुजरता है, तब प्रधानमंत्री की अपील सिर्फ एक राजनीतिक संदेश नहीं होती, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी का आह्वान बन जाती है। यही वजह है कि पीएम मोदी की हालिया अपील को गंभीरता से लेना देशहित से जोड़कर देखा जा रहा है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययता की अपील का कितना असर है, इसकी बानगी 14 मई को नई दिल्ली में देखने को मिली। इस अपील के मद्देनजर सीएम डॉ. यादव ने आम आदमी की तरह नई दिल्ली में कारकेड की जगह मेट्रो ट्रेन से सफर किया। इतना ही नहीं, उन्होंने जनता से संवाद भी किया। उन्होंने सह यात्रियों से उनके विचारों को जाना। उन्होंने जनता को और जनता ने उन्हें बताया कि विश्वास और विकास साथ-साथ कैसे चल सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने गाइडलाइन भी बनाई है। सीएम डॉ. मोहन यादव वो सब उपाय कर रहे हैं, जिससे देश के लिए डॉलर बचे और देश की विदेश पर निर्भरता कम हो। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का सबको पालन करना चाहिए। यह देश हित में है। देश को मजबूत स्थिति में लाना है तो जीवन पद्धति में अनुशासन और परिवर्तन लाना पड़ेगा।
Fuel Saving Appeal : देश जब किसी बड़े वैश्विक, आर्थिक या सामरिक चुनौती के दौर से गुजरता है, तब प्रधानमंत्री की अपील सिर्फ एक राजनीतिक संदेश नहीं होती, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी का आह्वान बन जाती है। यही वजह है कि पीएम मोदी की हालिया अपील को गंभीरता से लेना देशहित से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैरजरूरी खर्चों में कटौती की अपील का असर अब देशभर में दिखाई देने लगा है। मिडिल ईस्ट संकट के कारण देश में बढ़े आर्थिक दबाव और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘ऊर्जा और संसाधन बचत’ की अपील का देशव्यापी असर हुआ है। देश की विदेशी मुद्रा को बचाने और ईंधन की खपत कम करने के लिए खुद पीएम मोदी, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और कई राज्य सरकारों ने जमीन पर बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार से लेकर निजी कंपनियों तक, कई स्तरों पर पीएम की अपील को गंभीरता से लिया जा रहा है।
Fuel Saving Appeal : मुख्यमंत्रियों को प्रेरित करने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सुरक्षा काफिले SPG में वाहनों की संख्या को 50% तक कम कर दिया है और काफिले में नई गाड़ियां खरीदे बिना मौजूदा इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। दरअसल प्रधानमंत्री की ये अपील ईंधन बचत, संसाधनों के सीमित उपयोग या आत्मनिर्भरता से जुड़ी है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। अब प्रधानमंत्री की अपील है और देश साथ चल पड़ा है। फिर भी सवाल यही है कि क्या ये सिर्फ वैक्ल्पिक उपाय है या इसके दूरगामी परिणाम भी होंगे। क्या देश के पास इस वैश्विक संकट से निकलने का यही उपाय है या और भी नीति और रणनीति। पीएम मोदी की अपील पर विपक्ष तो सवाल खड़े कर ही रहा है। इसी मुद्दे पर हम चर्चा करेंगे लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।।।
Fuel Saving Appeal : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ईंधन बचत, विदेशी यात्राओं में कटौती, वर्क फ्रॉम होम और एक साल तक सोना नहीं खरीदने, जैसे सुझावों का असर अब देशभर में दिखाई देने लगा है।देश में कई राज्यों और सरकारी विभागों ने ईंधन बचाने के लिए पहल शुरू कर दी हैं।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाकर संदेश दिया, जिसके बाद कई केंद्रीय मंत्रियों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों ने भी अपने काफिले छोटे कर दिए हैं। इसके अलावा न्यायाधीशों और अधिकारियों ने भी वाहनों में कटौती की है, साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग पर जोर बढ़ाया है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी इस दिशा में सक्रिय हो गए हैं।
Fuel Saving Appeal : प्रधानमंत्री की नसीहत और मुख्यमंत्रियों के निर्देश के बाद अब अलग अलग राज्यों से राजनेताओं और अफसरों की कई तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। जिसमें कोई साइकल पर है, कोई इलेक्ट्रिक स्कूटर पर सवार है, तो कोई ई रिक्शों की सवारी करते नजर आ रहा है।सरकार के नेता और मंत्री इसे संकट के वक्त राष्ट्रहित के लिये जरूरी बता रहे हैं। अब सियासत भले जो भी हो लेकिन पीएम मोदी की अपील का असर ट्रैवल और ज्वेलरी सेक्टर पर भी देखने को मिल रहा है। विदेशी यात्राओं की बजाय घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की चर्चा तेज हुई है, वहीं सोने की खरीद कम करने की अपील से बाजार में हलचल बढ़ी है। सरकार और उद्योग जगत अब ऊर्जा संरक्षण और विदेशी मुद्रा की बचत को राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में देख रहे हैं। अब पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री का संदेश केवल अपील नहीं, बल्कि आर्थिक सतर्कता का संकेत है। जिसे राष्ट्रीय हित, आर्थिक मजबूती और सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखने की जरूरत है।

