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Lucknow योगी सरकार का ‘ऑपरेशन क्लीन’: आयुष्मान योजना में पारदर्शिता के लिए चला विशेष अभियान, निशाने पर डेटा विसंगतियां

Lucknow

Report: Vandna Rawat

Lucknow : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इसी क्रम में आयुष्मान भारत (पीएम-जय) योजना के तहत अस्पतालों और चिकित्सकों के डेटा के सत्यापन के लिए एक व्यापक ‘सैनेटाइजेशन अभियान’ चलाया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना और किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक अनियमितता को रोकना है।

Lucknow डेटा ऑडिट में हुआ बड़ा खुलासा: एक डॉक्टर और दर्जनों अस्पताल

‘साचीज’ (SACHIS) की सीईओ अर्चना वर्मा के अनुसार, डेटा के गहन परीक्षण के दौरान कई चौंकाने वाली विसंगतियां सामने आईं। समीक्षा में पाया गया कि:

  • 28 चिकित्सकों के नाम 15 से अधिक अस्पतालों से जुड़े हुए थे।
  • 274 चिकित्सकों का डेटा 7 से अधिक अस्पतालों के रिकॉर्ड में दर्ज पाया गया। प्रशासन ने इस विसंगति पर तत्काल कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अस्पतालों और चिकित्सकों को नोटिस जारी किए हैं। उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है।

Lucknow अभियान का लक्ष्य: गुणवत्तापूर्ण इलाज और संसाधनों का सही उपयोग

सीईओ ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य चिकित्सकों को परेशान करना नहीं, बल्कि डेटा को अपडेट करना है। जांच में यह भी पता चला कि कई मामलों में चिकित्सक पहले उन अस्पतालों में थे, लेकिन उनके हटने के बाद रिकॉर्ड अपडेट नहीं किए गए थे। दूसरी ओर, कई विशेषज्ञ वास्तव में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिससे दूरस्थ इलाकों के मरीजों को लाभ मिल रहा है। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग न हो और योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुँचे।

Lucknow आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन: अब हर मरीज का होगा ‘डिजिटल रिकॉर्ड’

भविष्य की तैयारियों को लेकर सरकार इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) को तेजी से बढ़ावा दे रही है। इसके लागू होने से निम्नलिखित लाभ होंगे:

  • पारदर्शी उपचार: मरीजों का पूरा मेडिकल इतिहास डिजिटल रूप में उपलब्ध होगा।
  • समय और पैसे की बचत: अस्पताल बदलने पर मरीजों को बार-बार एक ही तरह की जांच कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  • मजबूत निगरानी: डिजिटल प्रक्रियाओं से सरकारी तंत्र की निगरानी अधिक प्रभावी होगी, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

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