by: vijay nandan
मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) में एक दुर्लभ और चमत्कारिक घटना दर्ज की गई है। 57 वर्षीय हथिनी अनारकली ने पहली बार दो मादा शावकों को जन्म दिया है, जिससे प्रदेश के वाइल्डलाइफ़ सर्कल में खुशी और उत्साह का माहौल है। वन विभाग के मुताबिक शावकों का जन्म लगभग तीन घंटे के अंतराल पर हुआ। यह घटना इसलिए और खास है क्योंकि दुनिया भर में हाथियों के जुड़वां जन्म बेहद कम देखे जाते हैं। विशेषज्ञों ने इसे प्रकृति का अनमोल उपहार बताया है।

मां और दोनों नवजात पूरी तरह स्वस्थ
वन्यजीव चिकित्सकों और विशेषज्ञों की टीम लगातार अनारकली और दोनों शावकों की निगरानी कर रही है।
वन प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता के अनुसार “हाथियों में जुड़वां जन्म अत्यंत दुर्लभ होता है। यह प्रकृति का अद्भुत चमत्कार है और संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्त्वपूर्ण।
अभी दोनों शावक सक्रिय, स्वस्थ और अपनी मां के साथ सुरक्षित हैं। पीटीआर में हाथियों की संख्या बढ़कर 21 हुई
पन्ना टाइगर रिजर्व मुख्यतः बाघों के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां हाथियों की भी मजबूत उपस्थिति है।
जुड़वां शावकों के आने के बाद रिजर्व में कुल 21 हाथी हो गए हैं।
फील्ड डायरेक्टर नरेश सिंह यादव ने बताया कि अनारकली के भोजन में दलिया, गन्ना, गुड़, शुद्ध घी के लड्डू जैसी पौष्टिक चीजें शामिल की गई हैं। नवजातों की देखभाल के लिए एक अलग टीम नियुक्त कर दी गई है।
1/n First record in Madhya Prdesh–
— Panna Tiger Reserve (@PannaTigerResrv) November 22, 2025
Female elephant (Captive – Anarkali age approx – 57 years) gave birth to twin female calves on 21/11/2025. The two births were recorded with an interval of approximately 3 hours and 30 minutes. pic.twitter.com/aPmtDZLLrx
अनारकली का सफर: 1986 में आई थी पन्ना
पीटीआर के रिकॉर्ड के अनुसार, अनारकली को 1986 में टाइगर रिजर्व में लाया गया था। वह अब तक छह बार बच्चों को जन्म दे चुकी है, लेकिन यह पहला अवसर है, जब उसने एक साथ जुड़वां मादा शावकों को जन्म दिया है। प्रशिक्षित हाथी रिजर्व में गश्त, बाघ गणना, रेस्क्यू ऑपरेशन और बारिश के मौसम में निगरानी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सहयोग करते हैं। ऐसे में यह जन्म वाइल्डलाइफ प्रबंधन के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
- एक नजर में पन्ना टाइगर रिजर्व:
- भारत का 22वां और मध्यप्रदेश का 5वां टाइगर रिजर्व
स्थापना: 1981
प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल: 1994
विंध्य पर्वतमाला के पन्ना एवं छतरपुर जिलों में फैला विशाल वन क्षेत्र
बाघ संरक्षण, मगर पुनर्वास और गिद्ध संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान





