Reporter: Mohit Kumar Saxena, Edit By: Mohit Jain
कोकलपुर का रहस्यमयी मेला
मध्य प्रदेश के सागर और रायसेन जिलों की सीमा पर बसा कोकलपुर गांव आजकल अपनी रहस्यमयी पहचान के लिए चर्चा में है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा की रात यहाँ एक ऐसा मेला लगता है, जिसे लोग “रूहानी ताकतों का संगम” कहते हैं। कहा जाता है कि इस रात इंसानों के बीच अदृश्य रूहें उतरती हैं और भोग स्वीकार करती हैं।

ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
कोकलपुर, जिसे प्राचीन समय में कुंतालपुर कहा जाता था, राजा चंद्रहास के शासनकाल का हिस्सा था। यहाँ माता रानी के मंदिर के नीचे छिपा एक विशाल खजाना बताया जाता है, जिसे अगर कभी बाहर निकाला गया, तो पूरे विश्व के लोगों का एक दिन का भोजन कराया जा सकता है।
मेले की भव्यता और रूहानी अनुभव
भोर से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है और सैकड़ों मिठाई की दुकानें सजती हैं। लोक-संगीत, शंख और घंटियों की ध्वनि वातावरण में गूंजती है। किंवदंती है कि इस दिन जिन्नात और रूहानी शक्तियाँ इंसानी रूप में आती हैं। उनकी मौजूदगी हवा में रहस्यमयी सरसराहट, दीयों की कांपती लौ और मिठाइयों के अचानक गायब हो जाने से महसूस की जाती है।

शाम का आकर्षण और प्रशासनिक व्यवस्था
जैसे ही सूर्य ढलता है, कोकलपुर दीयों की रौशनी में एक रहस्यमयी नगरी में बदल जाता है। लोग दूर-दूर से आस्था, लोक-परंपरा और रहस्य का यह संगम देखने आते हैं। प्रशासन की देखरेख में मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होता है, और स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी माता रानी के दरबार में नतमस्तक होकर आस्था व्यक्त करते हैं।





