Reporter: Suresh Kumar, Edit By: Mohit Jain
जिले में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने खुद को मध्यप्रदेश का मुख्य सचिव अनुराग जैन बताकर सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल को फोन किया। उसने कहा
“हैलो गौरव, मैं चीफ सेक्रेटरी अनुराग जैन बोल रहा हूं… मिश्रा जी को मंगलवार को भेज रहा हूं, उनका टेंडर संबंधी कार्य कर देना है।”
कलेक्टर को कॉल पर शक हुआ और उन्होंने तुरंत पुलिस अधीक्षक को इसकी जानकारी दी। इसके बाद एक संगठित साजिश का पर्दाफाश हुआ।

कलेक्टर के कक्ष में पकड़े गए दो आरोपी
मंगलवार को दो व्यक्ति सचिन्द्र तिवारी (23) निवासी कुशमहरा और आईबी के सब-इंस्पेक्टर वाल्मीकि प्रसाद मिश्रा (44) कलेक्ट्रोरेट पहुंचे। जैसे ही वे कलेक्टर के कक्ष में पहुंचे, पहले से मौजूद पुलिस ने दोनों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया।
फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड निकला सब-इंस्पेक्टर का बेटा
पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह पूरा षड्यंत्र वाल्मीकि मिश्रा के बेटे सचिन कुमार मिश्रा ने रचा था। पुलिस ने सचिन को भोपाल से गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि पिता-पुत्र ने डीएमएफ फंड से जुड़े टेंडर को अपने पक्ष में कराने के लिए फर्जी कॉल की साजिश रची थी।

तीनों पर दर्ज हुआ मामला, भेजे गए जेल
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 204, 319, 61 तथा आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया है। मंगलवार को तीनों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
पुलिस कर रही पुराने मामलों की जांच
जांच में यह भी संभावना जताई जा रही है कि यह गैंग पहले भी इसी तरह के फर्जी कॉल या टेंडर कार्यों में दखल दे चुका हो सकता है। जिले में डीएमएफ फंड से जुड़ी खरीदी में दलालों की भूमिका को लेकर पहले से ही चर्चाएं चल रही हैं।





