वक्फ कानून पर सियासी संग्राम: किरेन रिजिजू का सुप्रीम कोर्ट और ममता बनर्जी पर बड़ा बयान

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kiren rijiju waqf bill

वक्फ कानून को लेकर चल रही राजनीतिक और कानूनी बहस के बीच केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने एक अहम बयान दिया है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई से ठीक पहले रिजिजू ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि अदालत इस विधायी मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

क्या बोले रिजिजू?

  • सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा: रिजिजू ने कहा, “हमारी न्यायपालिका संविधान का सम्मान करती है। शक्तियों का बंटवारा स्पष्ट है, इसलिए हमें उम्मीद है कि कोर्ट विधायिका के फैसले में दखल नहीं देगा।”
  • ममता बनर्जी पर निशाना: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वक्फ कानून को लागू न करने के ऐलान पर उन्होंने सवाल उठाया। रिजिजू ने कहा, “क्या किसी मुख्यमंत्री को यह अधिकार है कि वह संसद द्वारा पारित कानून को मानने से इनकार कर दे? यह संविधान की अवमानना है।”
  • राजनीतिक दोगलेपन पर प्रहार: उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता मुस्लिम समुदाय को सिर्फ वोट बैंक के तौर पर देखते हैं और उनके हितों की वास्तव में परवाह नहीं करते।
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क्या है पूरा मामला?

  • वक्फ कानून में हाल ही में संशोधन किया गया है, जिसके तहत वक्फ बोर्ड्स को अधिक अधिकार दिए गए हैं।
  • इस कानून को लेकर कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 25-28 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है।
  • कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है, हालांकि यह भी स्पष्ट किया है कि वह विधायिका के काम में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करेगा।

ममता बनर्जी का रुख

पश्चिम बंगाल की सरकार ने वक्फ कानून को राज्य में लागू करने से इनकार कर दिया है। ममता बनर्जी ने पहले भी CAA, NRC और UCC जैसे केंद्रीय कानूनों को बंगाल में लागू नहीं होने दिया था। रिजिजू ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर कोई मुख्यमंत्री संसद के कानून को मानने से इनकार करता है, तो क्या उसके पास संवैधानिक पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार बचता है?”

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जल्द होनी है। केंद्र सरकार का रुख साफ है कि वह इस कानून को पूरी तरह लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, विपक्षी दल और कुछ राज्य सरकारें इसे धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ बता रही हैं।

निष्कर्ष: यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक गलियारों में गर्म बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस विवाद का अंतिम समाधान साबित हो सकता है।

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