Report: Ratan kumar
Jamtara Cyber Crime Police Action साइबर अपराध के गढ़ के रूप में कुख्यात जामताड़ा में पुलिस ने ठगों के खिलाफ एक और बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। जामताड़ा पुलिस अधीक्षक (SP) शंभु कुमार सिंह के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत तीन शातिर साइबर अपराधियों को रंगे हाथों दबोचा गया है। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर करमाटांड़ थाना क्षेत्र के कई गांवों में एक साथ छापेमारी (Raids) कर इस गिरोह का भंडाफोड़ किया।

Jamtara Cyber Crime Police Action तीन गांवों में एक साथ दबिश; रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी
Jamtara Cyber Crime Police Action साइबर डीएसपी अमित कुमार ने रविवार (31 मई 2026) को जामताड़ा साइबर अपराध थाने में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पूरे ऑपरेशन का विवरण साझा किया:
- छापेमारी टीम: पुलिस अधीक्षक के आदेश पर पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी राजेश मंडल और पु०नि० चन्द्रमणि भारती के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी दल का गठन किया गया था। इस टीम ने पिण्डारी, सकलपुर एवं तिलैया (केन्दुआटांड़) गांवों में योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी।
- गिरफ्तार ठगों की पहचान: पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों में प्रीतम दास (उम्र 25 वर्ष, निवासी पिण्डारी दास टोला), विनोद दास (उम्र 23 वर्ष, निवासी पिण्डारी) और मो० तुफान उर्फ तुफान अंसारी (उम्र 28 वर्ष, निवासी बरमुण्डी) शामिल हैं। ये सभी उस वक्त ऑनलाइन ठगी को ही अंजाम दे रहे थे।
Jamtara Cyber Crime Police Action 10 मोबाइल और 10 सिम कार्ड जब्त; मामला दर्ज
दर्ज हुई प्राथमिकी: इस बड़ी कार्रवाई के बाद जामताड़ा साइबर अपराध थाने में कांड संख्या 31/26 (दिनांक 30 मई 2026) के तहत विभिन्न कानूनी और सूचना प्रौद्योगिकी (IT Act) की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल होने वाले 10 चालू मोबाइल फोन और 10 एक्टिवेटिड सिम कार्ड बरामद किए हैं।
Jamtara Cyber Crime Police Action बैंकों के क्रेडिट-डेबिट कार्ड धारक थे मुख्य निशाने पर
पूछताछ में आरोपियों ने अपनी मोडस ऑपेरंडी (काम करने के तरीके) को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:

- फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल: ये अपराधी खुद को HDFC बैंक, SBI (भारतीय स्टेट बैंक) और अन्य नामी बैंकों के कस्टमर केयर अधिकारी बताते हुए क्रेडिट और डेबिट कार्ड धारकों को रैंडम कॉल करते थे।
- कार्ड ब्लॉक होने का झांसा: ठग उपभोक्ताओं को डराते थे कि उनका एटीएम/क्रेडिट कार्ड तुरंत बंद होने वाला है या नया कार्ड जारी करने के लिए वेरिफिकेशन जरूरी है।
- गोपनीय जानकारी की चोरी: डरे हुए ग्राहकों से ये चालाकी से उनकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी जैसे कार्ड नंबर, सीवीवी (CVV) और मोबाइल पर आया ओटीपी (OTP) हासिल कर लेते थे।
- ई-वॉलेट से पैसों की चपत: डाटा मिलते ही ये आरोपी विभिन्न ई-वॉलेट और डिजिटल पेमेंट गेटवे के माध्यम से पीड़ितों के खातों से रकम उड़ा लेते थे। इनका यह ठगी नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला हुआ था।





