Isa Ahmad
Heat Wave Impact: प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार चल रही गर्म हवाओं का असर अब वन्यजीवों पर भी दिखाई दे रहा है। पंडरिया क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में हीट वेव के कारण बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौत की खबरें सामने आई हैं। पेड़ों पर झुंड में रहने वाले ये जीव अत्यधिक तापमान और लू का सामना नहीं कर पा रहे हैं, जिससे वे बेहोश होकर जमीन पर गिर रहे हैं और दम तोड़ रहे हैं।
Heat Wave Impact: 43 से 46 डिग्री तापमान ने वन्यजीवों को बनाया कमजोर
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से तापमान लगातार 43 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। दोपहर के समय पेड़ों के नीचे मृत चमगादड़ों की संख्या बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि कई चमगादड़ सीधे पेड़ों से गिरते देखे गए, जबकि कई पेड़ों पर मृत अवस्था में लटके हुए पाए गए।
Heat Wave Impact: वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि चमगादड़ गर्म रक्त वाले स्तनधारी जीव हैं और अत्यधिक तापमान इनके लिए जानलेवा हो सकता है। लगातार चलती गर्म हवाओं और पेड़ों में पर्याप्त ठंडक न मिलने के कारण इनके शरीर में पानी की कमी और हीट स्ट्रेस की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिससे उनकी मौत हो रही है।
Heat Wave Impact: जलवायु परिवर्तन के संकेत और संरक्षण की आवश्यकता
जानकारों के अनुसार यह घटना केवल चमगादड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि भीषण गर्मी के कारण पक्षियों और अन्य वन्य जीवों पर भी संकट गहराता जा रहा है। पर्यावरणविद इसे जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान का गंभीर संकेत मानते हैं।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और वन विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और वन्यजीवों के लिए जल स्रोत उपलब्ध कराने की मांग की है। चमगादड़ों की सामूहिक मौत ने लोगों में चिंता पैदा कर दी है और पर्यावरणीय संतुलन पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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विशेषज्ञों की मुख्य बातें:
- 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान चमगादड़ों के लिए खतरनाक है।
- हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन उनकी मौत का मुख्य कारण बन रहा है।
- लगातार बढ़ता तापमान वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए चुनौती बन गया है।





