Edit by: Priyanshi Soni
Vijay Shah Colonel Sophia Controversy: कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के रवैये पर हैरानी जताई है। यह विवाद ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आया, जब मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
Vijay Shah Colonel Sophia Controversy: एसआईटी की रिपोर्ट और सरकार की देरी
कोर्ट को बताया गया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति के लिए राज्य सरकार से अनुरोध किया था, लेकिन अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि अगस्त 2025 से जनवरी 2026 तक सरकार ने इस आवेदन पर निर्णय नहीं लिया।
Vijay Shah Colonel Sophia Controversy: विजय शाह की याचिका और माफी का मुद्दा
विजय शाह ने एफआईआर रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनकी ओर से दलील दी गई कि वह सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं और जांच में सहयोग कर रहे हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि रिकॉर्ड में कोई वैध माफीनामा मौजूद नहीं है और अब इसमें बहुत देर हो चुकी है।
Vijay Shah Colonel Sophia Controversy: मुख्य न्यायाधीश की सख्त टिप्पणी
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एसआईटी ने जांच पूरी कर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश राज्य सरकार को भेजी थी, लेकिन यह फाइल अब तक लंबित है। उन्होंने स्पष्ट कहा,“आप 19 अगस्त 2025 से एसआईटी रिपोर्ट पर कोई फैसला नहीं ले सके हैं और अब 19 जनवरी हो गई है।”
सील कवर रिपोर्ट और जांच के पहलू
कोर्ट ने बताया कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सील कवर में जमा की थी, जिसे ओपन कोर्ट में खोला गया। रिपोर्ट में विभिन्न पहलुओं की जांच का उल्लेख है, हालांकि याचिकाकर्ता के पुराने मामलों को इसमें शामिल नहीं किया गया।

Vijay Shah Colonel Sophia Controversy: राज्य सरकार को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कानून के तहत अभियोजन की मंजूरी देने या उस पर उचित निर्णय लेने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान खुफिया विभाग के डीआईजी डी. कल्याण चक्रवर्ती भी मौजूद थे, जिन्हें अन्य याचिकाओं में उठाए गए बिंदुओं पर गौर करने को कहा गया।
माफी पर कोर्ट का रुख
कोर्ट ने पहले ही विजय शाह की सार्वजनिक और ऑनलाइन माफी को अस्वीकार करते हुए कहा था कि यह कानूनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है। कोर्ट ने इसे “मगरमच्छ के आंसू” बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि माफी मांगने का भी एक संवैधानिक और कानूनी तरीका होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मामले में देरी अस्वीकार्य है और राज्य सरकार को जल्द से जल्द एसआईटी की सिफारिशों पर फैसला लेना होगा।
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