Unnao Sadar Municipal Corporation Corruption Sweta Mishra : उन्नाव सदर नगर पालिका में ‘खजूर’ और ‘खनन’ का खेल: मंडलायुक्त की जांच में 5 गंभीर आरोप सिद्ध; सभासदों ने डीएम से मिलकर की अध्यक्ष श्वेता मिश्रा को हटाने की मांग, आंदोलन की चेतावनी
Unnao Sadar Municipal Corporation Corruption Sweta Mishra “भ्रष्टाचार दिनों दिन बढ़ रहा है, गरीब इंसान इस आग में जल रहा है”—यह पंक्तियां इस समय उन्नाव की सदर नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर बिल्कुल सटीक बैठ रही हैं। उन्नाव नगर पालिका में जारी प्रशासनिक गतिरोध और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर दर्जनों सभासदों ने मोर्चा खोल दिया है। मंडलायुक्त (कमिश्नर) की उच्च स्तरीय जांच में पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा के खिलाफ लगे 17 गंभीर आरोपों में से 5 आरोप पूरी तरह सिद्ध पाए जाने के बाद सियासी भूचाल आ गया है। इस मामले में प्रशासनिक स्तर से दंडात्मक कार्रवाई में हो रही देरी से नाराज सभासदों ने एक रिसॉर्ट में प्रेस कॉन्फ्रेंस (मीडिया वार्ता) की और “तीन साल, जन-जन बेहाल” का नारा देते हुए पालिका अध्यक्ष के खिलाफ ‘हल्ला बोल’ दिया। इसके बाद सभासदों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी (DM) से मुलाकात कर दोषी पालिका अध्यक्ष के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की और कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
Unnao Sadar Municipal Corporation Corruption Sweta Mishra ‘तीन साल बेमिसाल’ के मंच पर फिसली अध्यक्ष पति की जुबान, खुद कबूला सच!
भ्रष्टाचार के 5 आरोप तय होने की खबरें मीडिया में सुर्खियां बनते ही बैकफुट पर आई पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने डैमेज कंट्रोल के लिए आनन-फानन में “तीन साल बेमिसाल” कार्यक्रम का आयोजन कर करोड़ों के विकास कार्य कराने का दावा किया। लेकिन इसी कार्यक्रम के दौरान एक दिलचस्प मोड़ आया:
मंच से दिया अजीब बयान: पालिका अध्यक्ष के पति प्रवीण भानू मिश्रा जब मंच से भाषण दे रहे थे, तब उनकी जुबान फिसल गई और उन्होंने खजूर पेड़ की खरीद-फरोख्त मामले में अनजाने में अपनी विफलता स्वीकार कर ली। उन्होंने दावा किया कि खजूर के पेड़ सरकारी ‘जेम पोर्टल’ (GeM Portal) पर उपलब्ध ही नहीं थे, इसलिए बाहर से खरीदने पड़े।
पड़ताल में झूठा निकला दावा: दूसरी तरफ, आक्रोशित सभासदों ने प्रमाण देते हुए कहा कि खजूर के पेड़ जेम पोर्टल पर पूरी तरह उपलब्ध हैं। मीडिया और तकनीकी पड़ताल में भी सभासदों का दावा सच निकला और जेम पोर्टल पर खजूर के पेड़ों की उपलब्धता का पुख्ता प्रमाण मिला।
करोड़ों का झोल (ऐसे पकड़ा गया भ्रष्टाचार): सूत्रों और दस्तावेजों के मुताबिक, जेम पोर्टल पर जो खजूर का पेड़ मात्र ₹3,000 (तीन हजार रुपये) की प्रति पेड़ लागत पर मिल रहा था, उसे बाईपास करके बाहरी वेंडर्स से करीब ₹30,000 (तीस हजार रुपये) प्रति पेड़ की अत्यधिक ऊंची और संदेहास्पद कीमत पर खरीदा गया। शासन और जांच समिति ने वित्तीय नियमों के इसी उल्लंघन को पकड़कर भ्रष्टाचार की पुष्टि की है।
Unnao Sadar Municipal Corporation Corruption Sweta Mishra मंडलायुक्त की जांच में सिद्ध हुए ये 5 प्रमुख और गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता और सभासदों (जिनमें ब्रजेश पांडेय और राजेंद्र भारतीय प्रमुख हैं) द्वारा की गई शिकायतों पर कमिश्नर की जांच समिति ने इन पांच बिंदुओं पर पालिका प्रशासन को दोषी माना है:
आरोप 1: श्रमिकों की भर्ती और टेंडर में चहेतों को लाभ (नियमों की अनदेखी) श्रमिकों की आउटसोर्सिंग भर्ती के लिए जेम पोर्टल पर जारी निविदाओं (Tenders) में सरकारी शासनादेशों का खुला उल्लंघन किया गया। कम रेट पर प्रामाणिक बोली लगाने वाली जेन्युइन फर्मों को बिना किसी तकनीकी या तार्किक कारण के रेस से बाहर कर दिया गया और टेंडर निरस्त किए गए।
आरोप 2: गौशाला चारा घोटाला गौवंश के चारे की आपूर्ति को लेकर भी जेम पोर्टल की निर्धारित पारदर्शी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए पुरानी निविदाओं को अनुचित तरीके से निरस्त कर नए टेंडर मैनेज किए गए।
आरोप 3: केरल से मंगाए गए खजूर के पेड़ों में ‘झोल’ उन्नाव को केरल जैसा खूबसूरत लुक देने के नाम पर खजूर के महंगे पेड़ मंगवाए गए थे। हालांकि जांच में रिश्तेदारी का आरोप तो साबित नहीं हुआ, लेकिन खरीद प्रक्रिया में जेम पोर्टल को दरकिनार कर राजस्व को भारी चपत लगाने की बात पूरी तरह सिद्ध पाई गई।
आरोप 4: डंपिंग यार्ड में अवैध मिट्टी खनन पालिका के डंपिंग यार्ड परिसर में बड़े पैमाने पर अवैध खनन को अंजाम दिया गया। खनन निरीक्षक (Mining Inspector) की जांच में पुष्टि हुई कि डंपिंग यार्ड से 600 घन मीटर मिट्टी अवैध रूप से खोदकर निकाल ली गई। पालिका प्रशासन जांच समिति के सामने यह साबित नहीं कर पाया कि इस भारी-भरकम मिट्टी का इस्तेमाल आखिर कहां किया गया।
आरोप 5: स्वच्छ भारत मिशन के तहत डस्टबिन वितरण में हेराफेरी कागजों पर स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 4,000 डस्टबिन (कूड़ेदान) और अन्य सामग्रियां खरीदने के बिल-वाउचर तो प्रस्तुत कर दिए गए, लेकिन यह डस्टबिन असल में किस-किस वार्ड में और किन नागरिकों को बांटे गए, इसका कोई वितरण रिकॉर्ड (Distribution Log) उपलब्ध नहीं कराया जा सका। जांच समिति ने इसे आंशिक रूप से घोटाला माना है।
Unnao Sadar Municipal Corporation Corruption Sweta Mishra पड़ाव अड्डा संचालन में राजस्व को भारी चपत
कमिश्नर की रिपोर्ट में सबसे तल्ख टिप्पणी पड़ाव अड्डा (पार्किंग/परिवहन शुल्क वसूली केंद्र) के संचालन को लेकर की गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इसके संचालन के लिए कोई ओपन और रेगुलर टेंडर प्रक्रिया (Open Bidding) नहीं अपनाई गई। नियमों को ताक पर रखकर पुरानी चहेती फर्म को ही अवैध रूप से ‘सेवा विस्तार’ (Extension) दे दिया गया। इसके चलते अन्य प्रतिस्पर्धी फर्मों को नीलामी में भाग लेने का अवसर ही नहीं मिला, जिससे नगर पालिका और प्रदेश सरकार के राजस्व को सीधे तौर पर लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
अब देखना होगा कि इस बेहद गंभीर और पुख्ता जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन और नगर विकास विभाग दोषी पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा और उनके सहयोगियों के खिलाफ क्या दंडात्मक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करता है।