बटला हाउस demolition पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश, निवासियों को चिंता का सामना करना पड़ेगा

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सुप्रीम कोर्ट ने बटला हाउस ध्वस्तीकरण याचिका पर दिया स्थगन

नई दिल्ली के बटला हाउस क्षेत्र में घरों और दुकानों के ध्वस्तीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की मांग पर फिलहाल रोक लगाने से इंकार कर दिया है। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने साफ किया कि 7 मई के अपने पहले के आदेश में जो अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया था, उसमें इस समय किसी तरह की हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।


सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

बटला हाउस के 40 से अधिक निवासियों ने ध्वस्तीकरण पर अस्थाई रोक की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि मामला जुलाई में गर्मी की छुट्टियों के बाद तब जाकर सुना जाएगा, जब कोर्ट पूरी तरह से काम करेगा।

सुनवाई के दौरान प्रमुख बिंदु:

  • कोर्ट ने याचिका का संक्षिप्त अवलोकन करते हुए कहा कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान मामले की substantive सुनवाई नहीं होगी।
  • वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने निवासियों की ओर से आग्रह किया कि ध्वस्तीकरण के खिलाफ तुरंत कोई कार्रवाई न की जाए।
  • कोर्ट ने साफ कहा कि अगर वे (निवासी) बिना सुनवाई के रोक लगाना चाहते हैं तो यह जोखिम लेने जैसा होगा।
  • याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया कि मामले को गर्मी की छुट्टियों के बाद जल्द सूचीबद्ध किया जाए, जिस पर कोर्ट ने सहमति जताई।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद 7 मई के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शुरू हुआ था, जिसमें एक अन्य बेंच ने कहा था कि 2019 में पीएम-यूडीएवाई योजना के बाहर बनी अनधिकृत इमारतों को ध्वस्त किया जाए। आदेश के तहत, निवासियों को कम से कम 15 दिन की नोटिस दी जानी थी ताकि वे उचित कानूनी कार्रवाई कर सकें।

  • DDA ने 26 मई को कई भवनों पर नोटिस लगाए, जिनमें कहा गया कि ये इमारतें गैरकानूनी हैं और 15 दिनों के भीतर खाली करानी होंगी।
  • ध्वस्तीकरण की शुरुआत 11 जून 2025 से करने का आदेश दिया गया है।
  • नोटिस पर लाल क्रॉस चिह्न लगाए गए, जिससे विवाद और बढ़ गया।

बटला हाउस में निवासियों की चिंता

  • बटला हाउस एक घनी आबादी वाला इलाका है, जहां ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं।
  • कई परिवारों ने दशकों से यहां रह रहे हैं और नोटिस को अन्यायपूर्ण और मनमाना बताया है।
  • वे कहते हैं कि नोटिस केवल भवनों पर चिपकाए गए, व्यक्तिगत रूप से नोटिस नहीं दी गई।
  • उन्होंने कहा कि पीएम-यूडीएवाई योजना के तहत उनकी वैधता का उचित परीक्षण किए बिना उन्हें हटाने का प्रयास हो रहा है।

अगली क्या कार्रवाई होगी?

  • निवासियों ने सुप्रीम कोर्ट में फिर से याचिका दायर की है और कहा है कि वे उचित अपीलीय प्राधिकारी के पास भी जाएंगे।
  • कोर्ट ने मामला जुलाई के दूसरे सप्ताह में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
  • 15 दिन की नोटिस अवधि 10 जून को समाप्त हो रही है, जिससे त्योहार ईद-उल-अजहा के करीब चिंता बढ़ गई है।

बटला हाउस की विशेष जानकारी

बटला हाउस, जामिया नगर का हिस्सा है, जो एक मेहनतकश और घनी आबादी वाला इलाका है। यह 2008 में राष्ट्रीय सुर्खियों में तब आया था जब यहां एक विवादास्पद पुलिस मुठभेड़ हुई थी। अब यह इलाका ध्वस्तीकरण के चलते फिर चर्चा में है।


निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल बटला हाउस में हो रहे अनधिकृत निर्माण के खिलाफ चल रहे ध्वस्तीकरण अभियान पर अस्थायी रोक नहीं लगाई है। मामले की अगली सुनवाई गर्मियों की छुट्टियों के बाद जुलाई में होगी। इस बीच affected परिवारों के लिए यह समय चिंता और अनिश्चितता से भरा है, खासकर जब यह त्योहारों के करीब है।

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