Report: Neha gupta
IAF AN-32 Aircraft Crash Assam असम के जोरहाट एयरबेस पर शनिवार को भारतीय वायुसेना (IAF) का AN-32 मालवाहक विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर ने जहाँ पूरे देश को झकझोर दिया, वहीं इस हादसे ने बिहार के भोजपुर जिले को एक कभी न भरने वाला गहरा जख्म दिया है। इस दर्दनाक क्रैश में भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड के कायमनगर गांव निवासी 22 वर्षीय वायु अग्निवीर दानिश आलम शहीद हो गए हैं। इस भीषण दुर्घटना में दानिश के साथ वायुसेना के चार अन्य वीर जवानों की भी जान जाने की खबर है। दानिश की शहादत की आधिकारिक सूचना मिलते ही उनके पैतृक गांव कायमनगर सहित पूरे भोजपुर जिले में शोक और मातम की लहर दौड़ गई है।

IAF AN-32 Aircraft Crash Assam माता-पिता का इकलौता सहारा थे शहीद दानिश, पिछले साल ही जॉइन की थी सेना
शहीद दानिश आलम कायमनगर निवासी मोहम्मद फारूक आलम के इकलौते लाडले बेटे थे। घर की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य होने के बावजूद दानिश ने देश सेवा का जज्बा मन में पाला और कड़ी मेहनत के दम पर सफलता हासिल की। उन्होंने 29 जून 2025 को एयरफोर्स स्टेशन बिहटा में अपनी आमद दर्ज कराई थी, जिसके बाद 3 जुलाई को वे बुनियादी प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) के लिए बेलगांव, कर्नाटक चले गए। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अक्टूबर 2025 में वे बतौर वायु अग्निवीर भारतीय वायुसेना का हिस्सा बने और उनकी पहली पोस्टिंग असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर कार्गो हैंडलिंग यूनिट में की गई थी।

IAF AN-32 Aircraft Crash Assam महज दो हफ्ते पहले ही छुट्टी काटकर लौटे थे ड्यूटी पर
परिजनों ने रुआंसे गले से बताया कि दानिश अभी हाल ही में 23 मई 2026 को छुट्टी लेकर अपने घर कायमनगर आए थे। घर में लंबे समय बाद खुशियों का माहौल था और पिता को उम्मीद थी कि बेटे की नौकरी से अब परिवार के दिन बहुरेंगे। छुट्टी बिताने के बाद 30 मई को ही वे वापस जोरहाट ड्यूटी पर लौटे थे। किसे पता था कि भाइयों में अकेले और दो बहनों के लाडले भाई से यह उनकी आखिरी मुलाकात साबित होगी। शनिवार सुबह जैसे ही वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने फोन पर हादसे और दानिश की शहादत की खबर दी, माँ अख्तरी बेगम और बहनें शगुफ्ता परवीन व गजाला परवीन चीख मारकर बेहोश हो गईं। पिता मोहम्मद फारूक आलम, जो एचपीसीएल (HPCL) गीधा में ऑपरेटर के रूप में काम करते हैं, इस वज्रपात से पूरी तरह टूट गए हैं।

IAF AN-32 Aircraft Crash Assam वीर सपूत को नमन करने उमड़ी लोगों की भीड़
दानिश के शहीद होने की खबर जंगल की आग की तरह पूरे कोईलवर इलाके में फैल गई। अपने जांबाज सपूत को खोने के गम में कायमनगर गांव के चूल्हे नहीं जले हैं। आसपास के सैकड़ों ग्रामीण, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी पीड़ित परिवार को इस असहनीय दुख की घड़ी में ढांढस बंधाने और सांत्वना देने उनके घर पहुंच रहे हैं। हर किसी की आंखें नम हैं और क्षेत्र के युवाओं को दानिश की देशभक्ति पर गर्व है। सैन्य सूत्रों के अनुसार, शहीद वायु सैनिक का पार्थिव शरीर आवश्यक प्रोटोकॉल और सम्मान के साथ जल्द ही उनके पैतृक गांव लाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय व सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।





