सीएम नीतीश कैसे करेंगे डैमेज कंट्रोल
वक्फ संशोधन बिल संसद से पास हो गया,राष्ट्रपति की मुहर के बाद कानून भी बन जाएगा. इस बिल का ज्यादातर विपक्षी दल अपने अपने तरीके से विरोध कर रहे हैं. लेकिन सबसे बड़े झंझावात नीतीश कुमार की पार्टी में शुरू हो गया है..बिल का समर्थन करना जेडीयू के कई मुस्लिम नेताओं को रास नहीं आया. जेडीयू में धड़ाधड़ इस्तीफे का दौर चल पड़ा है..अब तक 7 मुस्लिम नेता इस्तीफा दे चुके हैं. सवाल ये है कि चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने मुस्लिम वोटर को नाराज करने की जहमत क्यों उठाई, क्या है उनकी प्लानिंग, क्या ये सिर्फ जेडीयू नेताओं द्वारा विरोध की खानापूर्ति है, सब कुछ नीतीश कुमार के अंडरकंट्रोल है. क्या आरजेडी को इसका फायदा मिलेगा..जेडीयू के खिलाफ क्या परसेप्शन बनेगा.. इस तमाम सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।
संसद में कई घंटों की बहस के बाद आखिरकार वक्फ संशोधन बिल पास हो गया. मोदी सरकार के लिए ये बडी उपलब्धि के तौर पर इसलिए देखा जा रहा है, कि एनडीए के सभी घटक दल समर्थन में उसके साथ खड़े रहे. यह बीजेपी के लिए तो ठीक है..बिल पास होते ही जनता दल यूनाइटेड में नया बवंडर शुरू हो गाय है..बिल का समर्थन करने से आहत जेडीयू के मुस्लिम नेता एक एक कर नीतीश साथ छोड़ रहे हैं. बगावत का झंडा उठाने वालों में पहला नाम है (gfx in) पूर्व प्रत्याशी मोहम्मद कासिम अंसारी ने इस्तीफा सौंप दिया है, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव शाहनवाज मलिक, बेतिया जिला के उपाध्यक्ष नदीम अख्तर, प्रदेश महासचिव सीएन तबरेज सिद्दीकी, पूर्व प्रदेश सचिव एम. राजू नैयर, मो. दिलशान राइन, मो. फिरोज खान ने शामिल हैं.

बिल का समर्थन, JDU में बवंडर
- मोहम्मद कासिम अंसारी
- शाहनवाज मलिक, इस्तीफा
- नदीम अख्तर,इस्तीफा
- तबरेज सिद्दीकी,इस्तीफा
- एम. राजू नैयर,इस्तीफा
- मो. दिलशान राइन,इस्तीफा
- मो. फिरोज खान,इस्तीफा
उधर पार्टी के सांसद ललन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा है कि इस्तीफा देने वाले कुछ नेताओं का जेडीयू संगठन से कोई औपचारिक संबंध नहीं है. सांसद ललन इन्हें छुटभैया नेता बताया।उधर जेडीयू के झंझावात पर आरजेडी को मौका मिल गया है. दो दिन पहले आरजेडी कार्यालय के बाहर एक पोस्टर लगाया गया, जिसमें नीतीश कुमार को गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला नेता दर्शाया. इतना ही नहीं बिल का समर्थन करने पर तेजस्वी यादव ने कहा कि सीएम नीतीश अचेत अवस्था में चले गए हैं।
विधानसभा में वोट का गणित
बिहार में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में जेडीयू के मुस्लिम नेताओं की नाराजगी पार्टी पर भारी भी पड़ सकती है. हालांकि यह भी देखने वाली बात है कि पार्टी को मुस्लिम मतों का कितना प्रतिशत हिस्सा मिलता रहा है. इसका आगामी चुनाव में क्या प्रभाव पड़ेगा? बिहार में प्रदेश की कुल जनसंख्या का लगभग 17.8% प्रतिशत मुस्लिम है. विधानसभा चुनाव 2020 में एनडीए को मुस्लिमों के लगभग 5 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि महागठबंधन के खाते में 76 प्रतिशत वोट गए थे. ऐसे में देखा जाए तो मुस्लिमों की लगभग 80 प्रतिशत आबादी आरजेडी और कांग्रेस वाले महागठबंधन के साथ है. आंकड़ें ये भी कहते हैं कि जेडीयू जब-जब बीजेपी के साथ आई उसका मुस्लिम वोट छिटकर महागठबंधन में चला गया. इसलिए राजनीतिक विश्लेषक जेडीयू में मुस्लिम नेताओं की बगावत को ज्यादा नुकसान के तौर पर नहीं देखते. शायद नीतीश कुमार के दिमाग में भी यही नफा नुकसान का गणित चल रहा है.
चुनावी वोट गणित
- कुल जनसंख्या में मुस्लिम वोटर 17.8%
- चुनाव 2020- एनडीए को 5% मुस्लिम वोट
- महागठबंधन को 76% मुस्लिमों के वोट गए
- महागठबंधन के खाते में 80% मुस्लिम आबादी
- JDU-BJP साथ-साथ तो मुस्लिम महागठबंधन के पाले में
- हेडर- वक्फ बिल का समर्थन
- जेडीयू में ‘मुस्लिम बवंडर’ !
- वक्फ बिल पर JDU में ‘सियासी बवंडर’
- JDU के 7 मुस्लिम नेताओं ने छोड़ा साथ
- बागी नेताओं को JDU ने बताया छुटभैया
- डैमेज कंट्रोल में जुटे ‘पॉलिटिकल मैनेजर’ !
- आरजेडी मौका देख, मार रही चौका-छक्का !
- मुस्लिमों की नाराजगी JDU को पड़ ना जाए भारी
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