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sanatan aur siyasat : सनातन में दो फाड़, अविमुक्तेश्वरानंद पर आर-पार

sanatan aur siyasat

By_ Pramod Shrivastava

sanatan aur siyasat : सनातन में दो फाड़ की और अविमुक्तेश्वरानंद पर आर-पार की। सनातन परंपरा के भीतर इस वक्त खुला टकराव नजर आ रहा है। विवाद के केंद्र में हैं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती । जिन पर लगे गंभीर आरोपों ने साधु-संतों, अखाड़ों और धार्मिक संगठनों को दो खेमों में बांट दिया है। तो वहीं राजनीतिक के केंद्र में भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मामला तूल पकड़े हुए हैं। अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य हैं और खुद को सनातन परंपरा की शुद्धता और मर्यादा का रक्षक बताते रहे हैं। लेकिन जो आरोप उन पर लगे हैं। उसने न केवल सनातन में घमासान मचा दिया है बल्कि राजनीति पारा भी चरम पर है।। सनातन संत में आर पार और उस पर हो रही राजनीति की चर्चा करेंगे।। लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।।।

sanatan aur siyasat : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रयागराज पुलिस पिछले तीन दिनों से वाराणसी में डेरा डाले हुए है। पुलिस उनसे पूछताछ कर सकती है, हालांकि अभी तक आश्रम नहीं पहुंची है। मामला हाई-प्रोफाइल होने के कारण पुलिस फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ा रही है। माना जा रहा है कि पूरी तैयारी और होमवर्क के बाद ही पुलिस शंकराचार्य या उनके शिष्यों से पूछताछ करेगी।उधर बुधवार को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर मीडिया से बात की। सभी आरोपों का खंडन किया और एफआईआर को उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से रची गई मनगढ़ंत साजिश बताया।उन्होंने कहा कि एक-डेढ़ महीने से कहा जा रहा है कि और भी छात्रों का शोषण हुआ है। अगर ऐसा है तो बाकी लोगों को क्यों बचाकर रखा गया है ? यदि किसी के साथ अन्याय हुआ है और सिर्फ दो लोगों से मुकदमा दर्ज कराया गया है, तो इससे पता चलता है कि इसके पीछे साजिश है। तो वहीं शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं ये बच नहीं सकते।

sanatan aur siyasat : पूरे मामले की बात करें तो प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ। इसके 8 दिन बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। इसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को दो बच्चों को कोर्ट में पेश किया। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई। FIR में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी बनाए गए। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। ये सब कुछ होने के बाद

sanatan aur siyasat :शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। तो वहीं मामले को लेकर संत समाज में भी दो फाड़ है। समर्थन और बचाव करने वाला पक्ष तो विरोध और आलोचना भी। समर्थक संत मामले को षड़यंत्र बता रहे है। तो वहीं विरोध करने वाले संतों का कहना है कि किसी उच्च पद पर बैठे संत पर ऐसे आरोप लगना ही कलंक है।
संतों में विरोध और समर्थक

sanatan aur siyasat : उधर मामले में राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप भी खूब सामने आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी पहले से ही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में पहले से है, तो वहीं अब कांग्रेस शंकराचार्य के समर्थन में उतर आई है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में कांग्रेस उनके समर्थन में प्रदर्शन करने की बात कही जा रही है। सपा नेताओं का कहना है कि शंकराचार्य जी के खिलाफ झूठे फर्जी मुकदमें लगाए गए हैं। और ये सब प्रदेश के मुख्यमंत्री के इशारे पर हो रहा है। तो वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा के राजनीतिक हित नहीं साधेंगे तो ये शंकराचार्य को भी नहीं छोड़ेंगे। यदि अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी हुई तो पूरे देश में कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी।

भाजपा के पूर्व मंत्री साक्षी महाराज ने कहा कि शंकराचार्य ने प्रयागराज में जो किया वो राजनीति से प्रेरित है। जो भी उन पर आरोप लगे हैं जांच होनी चाहिए, दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। तो वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओपी राजभर शंकराचार्य के सभी दावों को झूठ करार दे रहे हैं।

बहरहाल अब शंकराचार्य के मामले में धर्म और राजनीति दोनों हैं। अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तो टकराव है ही, संत समाज भी दो धड़ों में बंटा हुआ है। यह टकराव धर्म और राजनीति के आपसी संबंधों के कारण और गहराया हुआ है। अब देखना ये होगा कि अविमुक्तेश्वरानंद पर लग रहे आरोपों में कितना दम है, कौन सच्चा है और कौन झूठा। देखना ये भी होगा कि शासन वर्सिस संत की कथा 2027 के चुनाव पर क्या और कितना असर डालती है।

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