Patanjali Ghee Defamation Case : भ्रामक विज्ञापनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट लगा चुका है फटकार,बाबा रामदेव और पतंजलि उत्पादों का, विवादों से गहरा नाता
Patanjali Ghee Defamation Case : एजेंडा में आज बात बृजभूषण पर कानूनी शिकंजे की और बात पतंजलि उत्पादों के गोरखधंधे की। जीहां कभी भ्रामक विज्ञापनों पर शीर्ष अदालत की सख्ती, कभी गाय का घी फेल होने पर जुर्माना, कभी एलोपैथी पर बयानबाजी और IMA से टकराव, तो कभी आंवला जूस की गुणवत्ता पर सवाल, बाबा रामदेव और उनके पतंजलि के उत्पादों को लेकर हमेशा से ही विवाद खड़े होते रहे हैं। फिलहाल जो मामला चर्चा में है वो है बृजभूषण शरण सिंह और पतंजलि आयुर्वेद के बीच का कानूनी विवाद का। दरअसल पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह द्वारा पतंजलि के उत्पादों, विशेषकर उनके देसी घी को “नकली” बताए जाने के कारण पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने उन पर 50 करोड़ का मानहानि का मुकदमा दायर किया है। मध्य प्रदेश के इंदौर हाई कोर्ट में इस मामले की कानूनी सुनवाई चल रही है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि पतंजलि का देसी घी नकली है। उन्होंने जनता को सलाह दी थी कि वे बाजार के घी के बजाय अपने घरों में गाय या भैंस पालकर खुद दूध और घी का उत्पादन करें। पतंजलि फूड्स लिमिटेड का आरोप है कि बृजभूषण शरण सिंह के इस तरह के झूठे बयानों से कंपनी की छवि (ब्रांड इमेज) को भारी नुकसान पहुंचा है। और इसके चलते शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों पर भी बुरा असर पड़ा। आपको बता दें कि बाबा रामदेव ने आयुर्वेदिक दवाओं की उपचारात्मक शक्तियों पर जोर देते हुए कहा कि यदि उनके दावे झूठे साबित हुए तो वह मृत्युदंड का सामना करने के लिए तैयार हैं। बहरहाल अब बृजभूषण पर कानूनी शिकंजा है, और उनकी माने तो पतंजलि उत्पादों का गोरखधंधा… इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे, लेकिन पहले ये रिपोर्ट देखिए।।।।
Patanjali Ghee Defamation Case : भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह और योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि फूड्स लिमिटेड के बीच का विवाद गहरा गया है। दरअसल बृजभूषण शरण सिंह एक नए कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। बाबा रामदेव के पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने उनके खिलाफ 50 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। पतंजलि का दावा है कि पूर्व सांसद ने कंपनी के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उसे नकली बताया था। मामला साल 2022 का है जब बृजभूषण शरण सिंह ने सार्वजनिक मंच से पतंजलि घी को नकली बताते हुए लोगों से घर में गाय या भैंस पालने की अपील की थी। उस समय भी बृजभूषण सिंह और बाबा रामदेव के बीच विवाद सामने आया था। जिसके बाद पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने बृजभूषण के खिलाफ 50 करोड़ का मानहानि का केस दायर किया, पतंजलि का आरोप है कि इस बयान से उनके ब्रांड की प्रतिष्ठा और कंपनी के शेयर की कीमतों को नुकसान पहुंचा है। यह मामला इंदौर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से होते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंचा। जहां इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ में सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान पतंजलि के वकील ने कहा कि पूर्व सांसद के इस बयान से कंपनी के ब्रांड इमेज को नुकसान पहुंचा है। शेयर मूल्य पर असर पड़ा और कंपनी को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। जिसके बाद लेकिन बृजभूषण सिंह अपने बयान पर कायम हैं, उन्होंने यह भी कहा कि अगर देशहित और नकली खाद्य पदार्थों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए अदालत उन्हें सजा देती है, तो वे जेल जाने को तैयार हैं और जमानत नहीं लेंगे। उन्होंने बाबा रामदेव और उनके सहयोगियों पर भी बयानबाजी करते हुए कहा कि वह किसी से डरने वाले नहीं हैं।
Patanjali Ghee Defamation Case : गौरतलब है कि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग ने 2025 में मानकों के अनुसार घी ना मिलने पर पतंजलि पर जुर्माना लगाया था। जांच में कंपनी का दूसरा सैंपल भी फेल हो गया। इसके बाद मामला कोर्ट गया जिसके बाद पतंजलि पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। हालांकि ये कोई पहला मामला नहीं है जब पतंजलि के उत्पादों को लेकर सवाल खड़े हुए हों, इससे पहले भी कई मामले ऐसे सामने आ चुके हैं। इससे पहले भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गंभीर बीमारियों को ठीक करने के पतंजलि के दावों और भ्रामक विज्ञापनों को लेकर कड़ी फटकार लगाई थी और कंपनी को माफी मांगने का आदेश दिया था। उत्पादों की गुणवत्ता के आरोपों के संदर्भ में पतंजलि पूर्व में भी कई कानूनी लड़ाइयों का सामना कर चुकी है।बहरहाल अब खाद्य सुरक्षा और मानकों पर पतंजलि से जुड़े वे विवाद जो चर्चा में रहे है, हालिया रिपोर्टों में FSSAI की ओर से पतंजलि के कुछ उत्पादों के लेबल, स्वास्थ्य संबंधी दावों और विज्ञापन दावों पर आपत्तियों का उल्लेख हुआ है। लेकिन आरोपों के बाद अब कानूनी शिकंजे के बावजूद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने बयानों पर टिके रहने की बात कही है। उनका तर्क है कि व्यावसायिक रूप से इतने कम दामों पर शुद्ध देसी घी बेचना गणितीय रूप से मुमकिन नहीं है। लेकिन सवाल सिर्फ पतंजलि के उत्पादों का नहीं, बल्कि हर उस खाद्य उत्पाद का है जो बड़े-बड़े हेल्थ क्लेम के साथ बाजार में पहुंचता है। ऐसे में निगरानी, पारदर्शिता और उपभोक्ता सुरक्षा के लिए आगे की कार्रवाई क्या होगी। ये बड़ा सवाल है।।।


