कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुणे की विशेष एमपी/एमएलए अदालत में सावरकर मानहानि मामले को लेकर एक नया मोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस मामले के शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर ने अपने परिवार के इतिहास को जानबूझकर छिपाया है, खासकर यह तथ्य कि वह महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के छोटे भाई गोपाल विनायक गोडसे के पोते हैं।
इस विवाद ने अब नया राजनीतिक और ऐतिहासिक आयाम ले लिया है, जिससे न केवल अदालत में बहस गरमाई है बल्कि देशभर में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
राहुल गांधी का मुख्य दावा: गोडसे परिवार से गुप्त संबंध
राहुल गांधी ने अपनी याचिका में कहा है कि सत्यकी सावरकर ने “बहुत ही चतुराई से” अपने मातृवंश के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियों को छिपाया।
- शिकायतकर्ता की मां, हिमानी अशोक सावरकर, गोपाल गोडसे की बेटी और नाथूराम गोडसे की भतीजी हैं।
- हिमानी सावरकर अभिनव भारत और अखिल भारतीय हिंदू महासभा जैसे हिंदुत्व संगठनों से जुड़ी सक्रिय राजनीतिक हस्ती भी थीं।
- यह पारिवारिक और वैचारिक संबंध विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिष्ठा और विरासत के मूल्यांकन में अहम भूमिका निभाते हैं।
राहुल गांधी के मुताबिक, इस परिवारिक कनेक्शन का खुलासा मानहानि मामले के फैसले के लिए निर्णायक हो सकता है।
विवाद की पृष्ठभूमि: सत्यकी सावरकर का मानहानि दावा
सत्यकी सावरकर ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने लंदन में मार्च 2023 के अपने भाषण में विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की।
- सत्यकी का कहना है कि गांधी ने सावरकर के लेखन से एक विवादित घटना का हवाला दिया, जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति पर हमले को “सुखद” बताया गया था।
- सत्यकी ने इस दावे को पूरी तरह नकारते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत गांधी को मानहानि का दोषी ठहराने की मांग की।
अदालत का निर्देश और अगली सुनवाई
न्यायिक मजिस्ट्रेट अमोल श्रीराम शिंदे ने सत्यकी से आरोपों का जवाब देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 12 जून को निर्धारित की गई है।
साथ ही, राहुल गांधी ने अदालत से आग्रह किया है कि सत्यकी को अपने मातृवंश की पूरी वंशावली का खुलासा करने वाला हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए जाएं। यदि सत्यकी ऐसा करने में विफल रहता है, तो मामला पुलिस जांच के लिए भेजा जाए।
अतिरिक्त आरोप और प्रक्रियागत बदलाव
राहुल गांधी ने सत्यकी पर झूठी गवाही और अदालत की अवमानना का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सत्यकी ने 9 मई को एक भ्रामक आवेदन दायर किया, जिसमें गांधी पर जमानत शर्तों के उल्लंघन का झूठा आरोप लगाया गया।
इससे पहले इस महीने अदालत ने गांधी के अनुरोध पर मामले को सारांश परीक्षण से सम्मन परीक्षण में बदल दिया था, जिससे अधिक व्यापक साक्ष्य और ऐतिहासिक दस्तावेज पेश किए जा सकेंगे।
राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व
यह मामला केवल मानहानि विवाद नहीं रह गया है, बल्कि भारतीय इतिहास के विवादास्पद व्यक्तित्व विनायक दामोदर सावरकर और उनके परिवार से जुड़े मुद्दों पर व्यापक बहस छेड़ रहा है।
- गांधी ने जोर देकर कहा कि इस परिवारिक और वैचारिक जुड़ाव की वजह से, सावरकर की छवि और विरासत पर प्रभाव पड़ता है।
- अदालत को इस बात का मूल्यांकन करना है कि क्या गांधी की टिप्पणी मानहानि है या नहीं, और इस संदर्भ में पारिवारिक इतिहास एक अहम कारक है।
निष्कर्ष
राहुल गांधी का आरोप है कि सत्यकी सावरकर ने अपनी मातृवंशावली छिपाकर न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाली है। अदालत की आगामी सुनवाई इस मामले के लिए निर्णायक साबित हो सकती है, जो न केवल राजनीतिक विमर्श में महत्वपूर्ण है बल्कि भारत के इतिहास को समझने में भी नई दृष्टि प्रदान कर सकती है।





