QUAD: अमेरिका के अटलांटा में शनिवार को क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक हुई। इसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर बैठक में शामिल हुए। बैठक में नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत की ओर से सबसे पहले राहत पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की गई। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, समुद्री रास्तों की सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
QUAD: नेपाल में राहत अभियान के लिए भारत की भूमिका को सराहा
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में क्वाड देशों ने नेपाल में बाढ़ के दौरान भारत की त्वरित सहायता और राहत प्रयासों की प्रशंसा की। बयान में इस बात को स्वीकार किया गया कि आपदा के बाद भारत ने सबसे पहले मदद पहुंचाने की पहल की थी। भारत की ओर से नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। इसके साथ ही आर्थिक सहायता भी दी गई थी।
Pleased to participate in QUAD Foreign Ministers’ Meeting in Atlanta, the third this year after our earlier interactions in New Delhi and Manila. Highlighted the importance of:
✅ Maintaining stability, driving prosperity and ensuring freedom of choice as our continuing commitments in the Indo-Pacific.
✅ Deepening cooperation to promote supply chain resilience and ensure technology, critical minerals & energy security.
✅ Countering non-market practices and increased economic stresses in the Indo-Pacific.
✅ Taking forward agreements on counter-terrorism, maritime security and capacity building to enhance resilience & contribute to peace and stability.
✅ Developing a more contemporary QUAD agenda with a practical approach.
🇮🇳 🇺🇸 🇦🇺 🇯🇵— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) October 31, 2026
क्वाड देशों ने नेपाल को संकट की घड़ी में मिले सहयोग की भी सराहना की। भारत की इस भूमिका को पड़ोसी देशों के साथ आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता के क्षेत्र में उसके सहयोग के तौर पर देखा जा रहा है। प्राकृतिक आपदा के समय त्वरित मदद पहुंचाने और राहत अभियान में योगदान देने का मुद्दा बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रहा।
QUAD: चीन की व्यापार नीतियों पर क्वाड ने जताई चिंता
बैठक में वैश्विक व्यापार और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। क्वाड देशों ने किसी देश का नाम लिए बिना ऐसी व्यापारिक नीतियों पर चिंता जताई, जिनसे दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है। संयुक्त बयान में निर्यात पर मनमाने प्रतिबंध लगाने और बाजार के सामान्य नियमों को प्रभावित करने वाली नीतियों का जिक्र किया गया।
बयान के मुताबिक, कुछ उद्योगों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन और असंतुलित व्यापारिक गतिविधियां वैश्विक सप्लाई चेन के लिए चुनौती बन सकती हैं। क्वाड देशों ने भरोसेमंद और खुली आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही कहा कि आर्थिक सुरक्षा, मजबूत बुनियादी ढांचे और स्थिर व्यापार व्यवस्था का वैश्विक विकास में अहम योगदान है।
QUAD: होर्मुज और लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा पर जोर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समुद्री रास्तों की सुरक्षा भी बैठक का महत्वपूर्ण मुद्दा रही। क्वाड देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।
संयुक्त बयान में कहा गया कि इन समुद्री मार्गों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा की आपूर्ति जुड़ी हुई है। ऐसे में यहां जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। क्वाड ने इन रास्तों से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर किसी तरह की बाधा या टोल नहीं लगाए जाने की बात भी कही।
इसके साथ ही चारों देशों ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री अधिकारों की रक्षा करने पर जोर दिया। इन समुद्री मार्गों में किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक व्यापार, ईंधन की उपलब्धता और कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
QUAD: जयशंकर ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता को बताया जरूरी
बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्वाड देशों ने इस क्षेत्र में सभी देशों को स्वतंत्र रूप से अपने फैसले लेने का अवसर सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
जयशंकर ने तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता भी बताई। उनके मुताबिक, आतंकवाद से मुकाबला, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय देशों की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आपसी सहयोग जरूरी है। इन क्षेत्रों में मिलकर काम करने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिल सकता है।
QUAD: जयशंकर ने सोशल मीडिया पर दी बैठक की जानकारी
एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अटलांटा में हुई बैठक को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस साल क्वाड विदेश मंत्रियों की यह तीसरी बैठक थी। इससे पहले नई दिल्ली और मनीला में भी क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हो चुकी है।
जयशंकर ने अपनी पोस्ट में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने के साथ देशों की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार करने पर भी जोर दिया। बैठक में इन विषयों पर चारों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
QUAD: G20 बैठक में भी जयशंकर ने उठाया था समुद्री सुरक्षा का मुद्दा
क्वाड बैठक से एक दिन पहले शुक्रवार को एस. जयशंकर ने G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भी समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को सामने रखा था। उन्होंने नागरिक जहाजों और उन पर काम करने वाले कर्मचारियों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर चिंता जताई थी।
जयशंकर ने कहा था कि समुद्री मार्गों पर होने वाले हमलों से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही प्रभावित होती है। इसका असर केवल संबंधित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ता है। उन्होंने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों पर इसके प्रभाव का जिक्र किया।
उनके मुताबिक, समुद्री रास्तों में बाधा आने से ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे इन जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने की आशंका रहती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना बेहद जरूरी है।


