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सीजफायर के बाद तीनों सेना की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस: कहा दुश्मन के 35-40 अफसर, 100 आतंकी ढेर किए

Post-Ceasefire Press Conference by Three Armed Forces: 35–40 Enemy Officers and 100 Terrorists Eliminated

BY: VIJAY NANDAN

ऑपरेशन सिंदूर: DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई की प्रमुख बातें

दिल्ली: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या के बाद, भारत ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने का संकल्प लिया।

  • लक्ष्य: ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकवादियों और उनके संरक्षकों को दंडित करना और उनके ठिकानों को नष्ट करना था।
  • कार्रवाई: 7 मई को, भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।
  • प्रमुख आतंकियों का खात्मा: मारे गए आतंकियों में यूसुफ अज़हर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सिर अहमद शामिल हैं, जो IC-814 विमान अपहरण और पुलवामा हमले में शामिल थे।
  • पाकिस्तानी सेना की क्षति: ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान सेना के 35 से 40 सैनिक और अधिकारी मारे गए।
  • भारतीय बलों की क्षति: इस कार्रवाई में भारतीय सेना के पांच जवान शहीद हुए।
  • सीज़फायर उल्लंघन: 10 मई को पाकिस्तान द्वारा सीज़फायर उल्लंघन के बाद, DGMO ने पाकिस्तानी समकक्ष से हॉटलाइन पर संपर्क किया, जिसके परिणामस्वरूप 17:00 बजे से गोलीबारी रोकने पर सहमति बनी।
  • भविष्य की चेतावनी: DGMO ने स्पष्ट किया कि यदि पाकिस्तान ने फिर से सीज़फायर का उल्लंघन किया, तो भारत की प्रतिक्रिया और भी कठोर होगी।

DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमारा उद्देश्य आतंकवादियों को दंडित करना और उनके ठिकानों को नष्ट करना था। हमने सटीक हमले किए और आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।” यह ऑपरेशन भारत की आतंकवाद के प्रति असहिष्णुता और उसकी संप्रभुता की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।

एयर मार्शल एके भारती के कहा:

  • भारतीय वायुसेना ने बहावलपुर और मुरीदके में स्थित आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर एयर-टू-सर्फेस गाइडेड मिसाइलों से सटीक हमले किए।
  • हमलों के दौरान कोलेटरल डैमेज को न्यूनतम रखने का प्रयास किया गया।
  • पाकिस्तान द्वारा 7 मई की रात को ड्रोन और यूएवी के माध्यम से किए गए हमलों को भारतीय वायुसेना ने सफलतापूर्वक विफल किया, जिसमें तीन ड्रोन भारतीय सीमा में गिरे, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
  • भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के लाहौर, गुजरांवाला, चकलाला, रफीकी, रहरयार खान, सियालकोट, सक्कर, सर्गोधा, भोलारी और जैकबाबाद स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
  • हमारी प्रतिक्रिया “तेज, समन्वित और मापी गई” थी, जिससे आक्रामकता को बर्दाश्त नहीं करने का स्पष्ट संदेश गया।

भारतीय नौसेना की भूमिका पर वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा :

1. तैनाती और तत्परता:

वाइस एडमिरल प्रमोद ने बताया कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के तुरंत बाद भारतीय नौसेना ने कैरियर बैटल ग्रुप (CBG), युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसैनिक विमानों को पूर्ण युद्ध तैयारियों के साथ अरब सागर के उत्तरी क्षेत्र में तैनात कर दिया। यह तैनाती तीनों सेनाओं के समन्वित ऑपरेशनल प्लान के अनुरूप थी।

2. हथियारों का परीक्षण और अभियान की तैयारी:

हमले के 96 घंटे के भीतर भारतीय नौसेना ने कई हथियार परीक्षण किए। इन परीक्षणों का उद्देश्य क्रू, हथियारों और प्लेटफॉर्म्स की दक्षता को परखना था ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि वे चुनिंदा ठिकानों पर सटीक वार करने में सक्षम हैं।

3. निगरानी और रोकथाम की रणनीति:

भारतीय नौसेना ने समुद्र में आक्रामक लेकिन संतुलित रुख अपनाया। नौसेना की इकाइयाँ लगातार पाकिस्तानी नौसेना और एयरफोर्स की गतिविधियों पर निगरानी रख रही थीं और आवश्यकता पड़ने पर कराची जैसे अहम ठिकानों को भी निशाना बनाने की पूरी तैयारी थी।

4. दुश्मन सेन की प्रतिक्रिया:

भारतीय नौसेना की सक्रियता के चलते पाकिस्तानी नौसेना और वायुसेना अपनी सीमाओं तक सीमित रहने को मजबूर हो गई। वे मुख्यतः अपने बंदरगाहों और तटीय इलाकों तक ही सीमित रहे, जिसे भारतीय निगरानी तंत्र लगातार देख रहा था।

5. संयमित और जिम्मेदार कदम:

वाइस एडमिरल प्रमोद ने यह भी कहा कि नौसेना की सभी कार्रवाईयाँ जिम्मेदारीपूर्ण और संयमित थीं। हमने आक्रामकता नहीं दिखाई लेकिन यदि आवश्यकता पड़ी तो निर्णायक जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार थे। सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच सटीक समन्वय बना रहा। वाइस एडमिरल प्रमोद के बयान ने स्पष्ट किया कि भारतीय नौसेना आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में पूरी तरह सक्षम और तत्पर थी, और ऑपरेशन सिंदूर में उसने अपनी भूमिका रणनीतिक रूप से निभाई।