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2024 में शीर्ष अमेरिकी बिजनेस स्कूलों में MBA ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी के अवसरों में गिरावट

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2024 में शीर्ष अमेरिकी बिजनेस स्कूलों में MBA ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी के अवसरों में गिरावट

हार्वर्ड और एमआईटी में सबसे बड़ी गिरावट

साल 2024 में टॉप यूएस बिजनेस स्कूलों से एमबीए ग्रेजुएट्स को नौकरी के ऑफर में भारी गिरावट देखी गई है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, हार्वर्ड, एमआईटी और स्टैनफोर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पास आउट छात्रों को नौकरी मिलने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। ग्रेजुएशन के तीन महीने बाद भी बड़ी संख्या में छात्र बिना नौकरी के हैं, और कुछ स्कूलों में बेरोजगारी की दर 15% तक पहुंच गई है।


प्रमुख संस्थानों में बढ़ती बेरोजगारी

रिपोर्ट के अनुसार, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में 2021 में जहां सिर्फ 4% छात्र बेरोजगार थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा 15% तक पहुंच गया है। एमआईटी स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में भी यही स्थिति देखी गई है, जहां बेरोजगारी की दर 4.1% से बढ़कर 15% हो गई है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में भी यह दर 4% से बढ़कर 12% हो गई है। वहीं, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में यह आंकड़ा 2.9% से 10.2% तक पहुंच गया है।


अन्य संस्थानों पर भी असर

  • यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में बेरोजगारी की दर 2.3% से बढ़कर 13.2% हो गई है।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया के व्हार्टन स्कूल में भी यह दर 1% से बढ़कर 6.9% तक पहुंच गई है।

नौकरी बाजार में गिरावट के कारण

रिपोर्ट के मुताबिक, इस गिरावट का मुख्य कारण कंसल्टिंग और टेक जैसे प्रमुख उद्योगों में नौकरियों की कमी है। मैकिन्सी जैसी बड़ी कंसल्टिंग फर्मों ने बूथ स्कूल से एमबीए ग्रेजुएट्स की भर्ती 2023 के 71 की तुलना में 2024 में घटाकर 33 कर दी है।

इसके अलावा, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी टेक कंपनियों ने भी एमबीए ग्रेजुएट्स की भर्ती कम कर दी है। ये कंपनियां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में निवेश पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।


एमबीए की डिग्री का भविष्य

हालांकि एमबीए ग्रेजुएट्स की शुरुआती सैलरी 2024 में $120,000 (लगभग 1 करोड़ रुपये) पर स्थिर है, लेकिन नौकरी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कम होते अवसरों के कारण एमबीए की डिग्री की उपयोगिता पर सवाल उठने लगे हैं।

हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के करियर डेवलपमेंट हेड क्रिस्टन फिट्ज़पैट्रिक के अनुसार, “एमबीए ग्रेजुएट्स भी नौकरी बाजार की मुश्किलों से अछूते नहीं हैं।”


निष्कर्ष

टॉप बिजनेस स्कूलों से एमबीए ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी के अवसर कम होने का मुख्य कारण आर्थिक मंदी और प्रमुख उद्योगों में भर्ती में कटौती है। इस स्थिति में एमबीए की डिग्री की प्रासंगिकता पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

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