भू-माफियाओं ने हड़पी करोड़ों की जमीन, फर्जीवाड़े में बड़े लोग भी शामिल

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अनिरुद्ध सोनोने , स्वदेश न्यूज़ भोपाल

भोपाल में बिल्डरों पर आईटी और ईडी की कार्रवाई से जुड़े सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट से जुड़ा बड़ा खुलासा हुआ है | भोपाल के बड़े तालाब के कैचमैंट इलाके में बनाए गए सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट की जमीन भोपाल विकास प्राधिकरण ने बॉटनिकल गार्डन के लिए सुरक्षित रखी थी जिसे जमीन माफिया ने हड़प लिया | इसी सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट में कई बड़े अधिकारी और मंत्रियों की जमीन और फ़ार्म हाउस जांच एजेंसीयों को मिले हैं | सेंट्रल पार्क में पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह , उनकी पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर जमीनें खरीदी गई इसके अलावा भी कई बड़े नेताओं और अफसरों के नाम सामने आए हैं | भोपाल के आरटीआई एक्टिविस्ट सतीश नायक ने इस मामले में बड़ा खुलासा किया है और सेंट्रल पार्क की जमीन को बीडीए द्वारा अलाट करना बताया है | एक ख़ास रिपोर्ट |

सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट में कई बड़े नाम आए सामने

भोपाल के सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट को लेकर दिसंबर 2025 में भोपाल में दो दर्जन से अधिक ठिकानों पर इनकम टेक्स विभाग ने छापे मारे थे | इसी मामले में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट त्रिशूल कंस्ट्रक्शन के मालिक राजेश शर्मा के संपत्ति अटैच कर चुका है | आईटी ने राजेश शर्मा की लगभग 400 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति अटैच की थी | राजेश शर्मा का कुणाल बिल्डर्स के जॉइंट वेंचर में सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट में काम चल रहा था जो अभी भी जारी है | सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट में कई आईएस आधीकारीयों , नेताओं , मंत्रियों के रिश्तेदारों आदि के बड़े नाम सामने आने से हर कोई हैरान है | यह प्रोजेक्ट भोपाल की लाइफ लाइन बड़े तालाब के कैचमैंट इलाके में है | दरअसल सेंट्रल पार्क की लगभग पांच सौ करोड़ की जमीन को भोपाल विकास प्राधिकरण की थी जिसे बिल्डरों ने हड़प कर उसमें फ़ार्म हाउस और प्लाट काट दिए |

दरअसल भोपाल के तालाब के ग्रीन बेल्ट और लो डेंसिटी एरिया में भोपाल के कुणाल बिल्डर की जमीनें है | कुणाल बिल्डर्स इस जमीन पर सेंट्रल पार्क के नाम से आवासीय प्रोजेक्ट डेवलप कर रहा है , कुणाल बिल्डर पिछले 10 साल में कई बार इसके लिए परमिशन मांग चुका है , हालांकि, लो डेंसिटी एरिया में जमीन होने के चलते परमिशन नहीं दी जा रही थी , बाद में जब 2012 में कुणाल बिल्डर्स और सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट के डायरेक्टर राजेश शर्मा के बीच एग्रीमेंट हुआ तो होने के बाद से जमीनों के लिए परमिशन मिल गई | अचानक रुकी हुई परमीशन इसलिए मिली क्योकि अब इस सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट में पूर्व मुख्य सचिव का दखल हो गया था क्योकि राजेश शर्मा उनका करीबी था | अब इस प्रॉपर्टी सहित कई जमीनों को जांच एजेंसीयां अटैच कर चुकी है |

रेड के बाद से त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी का मालिक राजेश शर्मा गायब

सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट को लेकर बीते दिनों आईटी ने रेड मारी थी भोपाल सहित कई जगहों पर ये रेड तीन दिनों तक चली थी , IT की रेड के बाद से त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी का मालिक राजेश शर्मा गायब है, इसके अलावा मामले में कथित एजेंट विश्वनाथ समेत इस प्रोजेक्ट से जुड़े लोग फरार हैं | भोपाल में सूरज नगर के पास सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है अब जांच एजेंसी सेंट्रल पार्क से जुड़े एसोसिएट्स पर कार्रवाई कर रही है जिसे सच सामने आ सके |

उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के दोनों बेटों, हर्ष देवड़ा और अन्य के नाम पर जमीन खरीदी गई


इस प्रोजेक्ट में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के दोनों बेटों, हर्ष देवड़ा और अन्य के नाम पर जमीन खरीदी गई है। इसके अलावा पूर्व मंत्री और विधायक भूपेंद्र सिंह और सीहोर विधायक सुदेश राय की भी इस प्रोजेक्ट में जमीन होने की बात सामने आई है। इस मामले में त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक राजेश शर्मा की संपत्तियों को अटैच कर दिया गया है। 

पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस का भी नाम


भू-राजस्व विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी से जमीन से जुड़ी गड़बड़ी का पता चलता है। पिछले कई सालों में रातीबड़, मेंडोरा, नीलबड़, मेंडोरी जैसे इलाकों में बेशकीमती जमीनें खरीदी गईं। हाल ही में अधिकारियों को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और उनकी पत्नी के नाम पर जमीन खरीदी के दस्तावेज मिले थे। यह सारी खरीद-फरोख्त बिल्डर राजेश शर्मा और उसके सहयोगियों के माध्यम से हुई थी। राजेश शर्मा पर हुई कार्रवाई में कई और अधिकारियों, नेताओं, व्यापारियों और अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं।

52 ठिकानों पर की थी छापेमारी


जांच में पता चला है कि नियमों को ताक पर रखकर यह जमीनें खरीदी गईं। राजेश शर्मा के जरिए इकबाल सिंह बैंस ने अपने और अपनी पत्नी के नाम पर करोड़ों रुपये की जमीन खरीदी। त्रिशूल, क्वालिटी और ईशान बिल्डर के कुल 52 ठिकानों पर छापेमारी में आयकर विभाग को 10 करोड़ रुपये नकद भी मिले। इसके साथ ही 25 लॉकर और सोना भी बरामद हुआ। बड़ी संख्या में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। यह जांच अभी जारी है और इसमें और भी खुलासे होने की संभावना है।

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