Ram Mandir Donation Controversy : क्या धर्म और आस्था के नाम पर खिलवाड़ ?आस्था पर चोट करारी, क्या चढ़ावे की हुई चोरी ?
Ram Mandir Donation Controversy : अयोध्या का राम मंदिर… जनभावनाओं का अटूट विश्वास… करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और सनातन संस्कृति का केंद्र।राम मंदिर केवल एक भव्य मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और जनभावनाओं के सम्मान का प्रतीक है।भगवान श्रीराम हर भारतीय जनमानस के आराध्य हैं और राम मंदिर करोड़ों लोगों की वर्षों पुरानी श्रद्धा और संकल्प का साकार रूप माना जाता है।लेकिन इस वक्त राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी और हेराफेरी पर बवाल मचा हुआ है, भगवान राम के नाम पर चढ़ावे का गोरखधंधा देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कथित चोरी और हेराफेरी के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। मामले को लेकर विपक्ष ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन और लेखा-जोखा में हेरफेर हुआ है, जिसके बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मामले के तूल पकड़ने के बाद इसकी जांच की मांग तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मुद्दे में पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, बीजेपी और मंदिर प्रशासन की ओर से आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया गया है। राम मंदिर देश की आस्था का केंद्र है, इसलिए चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों ने केवल प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी जन्म दे दिया है। अब सभी की निगाहें जांच प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी तय होगी। इसी मुद्दे पर हम चर्चा करेंगे लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं
Ram Mandir Donation Controversy : अयोध्या स्थित राम मंदिर में 5 से 7 करोड़ की चढ़ावे की राशि में कथित चोरी और हेराफेरी के आरोपों को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। विवाद बढ़ने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच कराए जाने का फैसला किया गया है। ये जांच समिति मंदिर प्रशासन, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, दान राशि के लेखा-जोखा और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। आपको बता दें कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। राम मंदिर के पूर्व अकाउंट्स इंचार्ज महिपाल सिंह ने दावा किया था कि दान संग्रह में लंबे समय से अनियमितताएं चल रही थीं और जब उन्होंने इस पर आवाज उठाई, तो उन्हें पद से हटा दिया गया। उन्होंने आरोप लगा कि चढ़ावे की गिनती, रिकॉर्ड और जमा राशि में गड़बड़ियां हुई हैं। इन शिकायतों के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र जांच की मांग उठी थी। मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय ने राम मंदिर ट्रस्ट से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही बीजेपी नेता ने निष्पक्षता के लिए मामले की सीबीआई या ईडी से जांच कराने की मांग की। लेकिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए पूरी तरह निराधार बताया है। कहा कि ट्रस्ट फंड का नियमित ऑडिट करते हैं और इसमें किसी भी तरह की विसंगति या गबन नहीं मिला है। तो वहीं ट्रस्टी महंत दीनेंद्र दास महाराज ने भी आरोपों को निराधार बताया।
Ram Mandir Donation Controversy : उधर राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष व महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास महराज ने कहा कि ये जो हल्ला मचा रहे हैं, ये कौन से दूध के धुले हैं, यदी बात सही है मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री छोड़ेंगे नहीं। तो वहीं बीजेपी नेता बृजभूषण सिंह ने कहा कि यदि मैं सत्य बोल दूंगा तो परेशानी में आ जाऊंगा। मामले में सरकार के मंत्रियों नेताओं का कहना है कि इस तरह की बातें, सनातन संस्कृति को लेकर विपक्ष की मानसिकता को दर्शाती है। ये सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करते हैं इनका सनातन और राममंदिर से कोई लेना देना नहीं। बीजेपी नेताओं ने कहा कि इस तरह के मामले सामने नहीं आना चाहिए, जो आस्था पर चोट करें। बहरहाल अब मामले में आरोपियों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है, जिसकी कोई पुष्टि नहीं है। लेकिन राम मंदिर के दानपात्रों से 5 करोड़ से 7 करोड़ की भारी-भरकम राशि गायब हुई या चोरी हुई ये जांच का विषय है। और जांच के बात ही तय होगा कि ये राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन में गड़बड़ी है या चोरी और हेराफेरी। लेकिन धर्म और आस्था के सबसे बड़े केंद्र राम मंदिर मामले को लेकर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विषय में पूरी निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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