जानिए किन चार ‘काल्पनिक देशों’ के नाम पर चल रही थीं एंबेसी

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BY: Yoganand Shrivastva

गाजियाबाद में हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फर्जी दूतावासों का संचालन हो रहा था। उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कविनगर क्षेत्र में एक ऐसे स्थान पर छापा मारा जहां एक साथ चार अलग-अलग देशों के नाम पर फर्जी एंबेसी चलाई जा रही थीं। इस घर के बाहर विशेष डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट लगी लग्जरी गाड़ियां भी मिलीं। छापेमारी के दौरान STF को 12 फर्जी राजनयिक पासपोर्ट और विदेश मंत्रालय की नकली मुहर वाले दस्तावेज भी मिले।

अब सवाल उठता है कि जिन चार देशों की ये फर्जी एंबेसी बताई जा रही थी, वे असल में कौन हैं? आइए जानें उनके बारे में:


1. वेस्ट आर्कटिका (Westarctica)

यह कोई मान्यता प्राप्त देश नहीं है। यह अंटार्कटिका के पास स्थित एक निर्जन क्षेत्र है जिसे 2004 में अमेरिकी नौसेना के एक अधिकारी ट्रैविस मैक्केन्हेन ने एक काल्पनिक राष्ट्र घोषित कर दिया था। उसने खुद को इसका “ग्रैंड ड्यूक” बताया और इसे एक चैरिटेबल संगठन के रूप में पेश किया जो पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का दावा करता है।


2. सेबोर्गा (Seborga)

इटली और फ्रांस की सीमा के पास स्थित एक छोटा सा गांव है, जिसे कुछ लोग स्वतंत्र राष्ट्र मानते हैं। सेबोर्गा कभी किसी देश के अधीन औपचारिक रूप से नहीं आया, इसी आधार पर वहां के स्थानीय लोग इसे एक “संप्रभु देश” मानते हैं। इसकी वेबसाइट पर भारत सहित कई देशों में स्वयंभू प्रतिनिधियों के नाम दिए गए हैं।


3. लैंडोनिया (Ladonia)

यह स्वीडन में स्थित एक काल्पनिक राष्ट्र है, जिसका क्षेत्रफल मात्र 1 वर्ग किलोमीटर है। इसके कथित नागरिकों की संख्या लगभग 29,000 बताई जाती है, जो विश्वभर में फैले हैं। यहां की “महारानी” और “राष्ट्रपति” दोनों अमेरिका में निवास करते हैं। इसे 1996 में एक कलाकार द्वारा स्थापित किया गया था।


4. पौलो वाई (Paloa Y)

यह कथित देश थाईलैंड की खाड़ी में स्थित बताया गया है। इसकी शुरुआत 1995 में वियतनाम के पूर्व राजवंश के प्रिंस गुयेन बाओ नाम ने की थी। यह भी खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र मानता है और अपनी सैन्य ताकत का दावा करता है।


ये सभी देश वास्तव में “काल्पनिक” या “सेल्फ-प्रोक्लेम्ड माइक्रोनेशन्स” (Self-declared micronations) हैं जिन्हें कोई भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त नहीं है। गाजियाबाद में इन देशों के नाम पर जो फर्जी दूतावास चल रहे थे, वे पूरी तरह अवैध और जालसाजी का हिस्सा थे। STF की कार्रवाई के बाद अब इस मामले में गंभीर जांच और संभावित गिरफ्तारियों की उम्मीद है।

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